रविवार, 9 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

कोयंबटूर: फैक्ट्री के प्रदूषण से फसलें तबाह, भूजल ज़हरीला, किसान बोले- 'सांस लेना भी मुश्किल'

तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक कास्ट आयरन यूनिट से निकलने वाले प्रदूषण ने दो गांवों के किसानों की ज़िंदगी मुश्किल कर दी है। सुलूर तालुक के अप्पानायक्कनपट्टी और करादिवावी गांवों के निवासियों का आरोप है कि…

कोयंबटूर: फैक्ट्री के प्रदूषण से फसलें तबाह, भूजल ज़हरीला, किसान बोले- 'सांस लेना भी मुश्किल'
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक कास्ट आयरन यूनिट से निकलने वाले प्रदूषण ने दो गांवों के किसानों की ज़िंदगी मुश्किल कर दी है। सुलूर तालुक के अप्पानायक्कनपट्टी और करादिवावी गांवों के निवासियों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और ज़हरीली गैसों के कारण न सिर्फ उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि भूजल भी दूषित हो गया है और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, किसानों ने शनिवार को बताया कि इस प्रदूषण ने उनकी आजीविका को संकट में डाल दिया है।

विज्ञापन

प्रभावित किसानों का कहना है कि समस्या रात के समय, रविवार और सरकारी छुट्टियों के दिन और भी गंभीर हो जाती है। उनका आरोप है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से बच्चों और बड़ों में स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां देखने को मिल रही हैं। लोगों को आंखों, नाक और गले में जलन, लगातार खांसी और गले में दर्द जैसी शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इलाके में पशुओं की मौत होने का भी दावा किया है।

फसलें बर्बाद, लागत भी नहीं निकल रही

एक स्थानीय किसान पी. रामकृष्णन ने बताया, "जहरीले उत्सर्जन के कारण हमारी फसलें नष्ट हो रही हैं। भूजल भी प्रभावित हुआ है और हमें खुलकर सांस लेने में मुश्किल हो रही है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ भूमि दलाल इस स्थिति का फायदा उठाकर किसानों पर अपनी कृषि भूमि बेचने का दबाव बना रहे हैं।

एक अन्य किसान सुंदरा पांडियन, जो फैक्ट्री से करीब 200 मीटर दूर तीन एकड़ में टमाटर और मिर्च उगाते हैं, ने दावा किया कि पिछले एक दशक में प्रदूषण के कारण उनकी फसलें बार-बार खराब हुई हैं। उन्होंने कहा कि किसान प्रति एकड़ लगभग 50,000 रुपये खर्च करते हैं, लेकिन फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं

किसानों के मुताबिक, औद्योगिक प्रदूषण ने उनकी ज़मीन पर मौजूद पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनकी कीमत घट गई है। उनका कहना है कि कई सालों से विभिन्न सरकारी विभागों में शिकायतें करने के बावजूद कोई स्थायी राहत नहीं मिली है। सुंदरा पांडियन ने कहा, "जब भी हम शिकायत करते हैं तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्व विभाग के अधिकारी दौरा करते हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता।"

अब परेशान किसानों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों से मामले की विस्तृत जांच करने और प्रदूषण को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि उनके गांवों के निवासियों के स्वास्थ्य, कृषि और आजीविका की रक्षा हो सके।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →