शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर चीन की 'इंतजार की रणनीति' से तिब्बत में आक्रोश बढ़ सकता है: रिपोर्ट

चीन, दलाई लामा के उत्तराधिकार के मसले पर एक सोची-समझी 'इंतजार की रणनीति' पर काम कर रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग को उम्मीद है कि 14वें दलाई लामा के बाद वह उनके उत्तराधिकारी को नियंत्रित कर…

दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर चीन की 'इंतजार की रणनीति' से तिब्बत में आक्रोश बढ़ सकता है: रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

चीन, दलाई लामा के उत्तराधिकार के मसले पर एक सोची-समझी 'इंतजार की रणनीति' पर काम कर रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग को उम्मीद है कि 14वें दलाई लामा के बाद वह उनके उत्तराधिकारी को नियंत्रित कर तिब्बत के मुद्दे को कमजोर कर देगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह कदम तिब्बती बौद्ध मूल्यों की अनदेखी है और इससे विरोध और भड़क सकता है।

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यह विश्लेषण 14वें दलाई लामा के भतीजे खेद्रूब थोंडुप ने 'द तिब्बत एक्सप्रेस' में लिखे अपने लेख में प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, बीजिंग का दलाई लामा के साथ बातचीत से लगातार इनकार करना कोई दुविधा नहीं, बल्कि एक जानबूझकर अपनाई गई चाल है। थोंडुप ने लिखा, "चीनी नेतृत्व 'वेटिंग गेम' (जानबूझकर टालना) अपना रहा है। उन्हें उम्मीद है कि दलाई लामा के बाद वे उत्तराधिकार को नियंत्रित कर सकेंगे और तिब्बत के मुद्दे को बेअसर कर देंगे।"

चीन की रणनीति और उसके डर

खेद्रूब थोंडुप के मुताबिक, बीजिंग की यह रणनीति तीन गलत धारणाओं पर आधारित है। पहली, दलाई लामा के बिना निर्वासित तिब्बती समुदाय बिखर जाएगा। दूसरी, चीन सरकार द्वारा नियुक्त दलाई लामा, निर्वासित समुदाय के उत्तराधिकारी की वैधता को खत्म कर देगा। और तीसरी, उनके निधन के बाद तिब्बत मुद्दे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की रुचि घट जाएगी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी अधिकारी बातचीत से इसलिए भी कतराते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे दलाई लामा को राजनीतिक वैधता मिलेगी, जो उन्हें 'अलगाववादी' बताने के चीनी दावे के विपरीत होगा। इसके अलावा, बीजिंग को यह भी चिंता है कि तिब्बत को दी गई कोई भी रियायत दूसरे अल्पसंख्यक क्षेत्रों को अधिक स्वायत्तता की मांग के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, जिससे चीन की केंद्रीकृत शासन प्रणाली को चुनौती मिल सकती है।

नियंत्रण की कोशिश के गंभीर परिणाम

थोंडुप ने चेतावनी दी है कि उत्तराधिकार को नियंत्रित करने की कोशिश के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के तिब्बती बौद्ध, चीन द्वारा नियुक्त दलाई लामा को शायद कभी स्वीकार न करें, जिससे बीजिंग का अधिकार कमजोर होगा। उन्होंने लिखा, "हालांकि इस तरीके से उन्हें थोड़े समय के लिए नियंत्रण मिल सकता है, लेकिन इससे उनकी वैधता, स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए बड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं।"

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जबरदस्ती थोपे गए कदम तिब्बतियों में नाराजगी बढ़ा सकते हैं और उन्हें चीन से और भी दूर कर सकते हैं। थोंडुप ने कहा कि इस विवाद से तिब्बत के लिए वैश्विक समर्थन कम होने के बजाय और बढ़ सकता है। उन्होंने निर्वासित तिब्बतियों के लिए एकता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय पक्षों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहने को बीजिंग की रणनीति का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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