सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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सोने की लगातार खरीदारी क्यों कर रहा है चीन? गोल्ड रिज़र्व 2400 टन के पार

बदलते वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच चीन अपने सोने के भंडार को लगातार मज़बूत कर रहा है। सितंबर में लगातार 23वें महीने सोने की ख़रीदारी के साथ चीन का कुल स्वर्ण भंडार अब लगभग 2,410 टन तक…

सोने की लगातार खरीदारी क्यों कर रहा है चीन? गोल्ड रिज़र्व 2400 टन के पार
(फोटो: IANS)

बदलते वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच चीन अपने सोने के भंडार को लगातार मज़बूत कर रहा है। सितंबर में लगातार 23वें महीने सोने की ख़रीदारी के साथ चीन का कुल स्वर्ण भंडार अब लगभग 2,410 टन तक पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS ने नाइल पोस्ट के एक लेख के हवाले से यह जानकारी दी है।

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रिपोर्ट के अनुसार, अकेले सितंबर महीने में चीन के केंद्रीय बैंक 'पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना' (PBOC) ने करीब 23 टन सोना खरीदा। यह कदम चीन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अमेरिकी डॉलर और यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।

डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

विश्लेषकों का मानना है कि 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज किए जाने की घटना से चीन ने सबक लिया है। इस घटना ने यह साफ़ कर दिया कि विदेशों में रखी गई डॉलर या यूरो जैसी संपत्तियां प्रतिबंधों की चपेट में आ सकती हैं। इसके विपरीत, देश की सीमाओं के भीतर रखा गया सोना ऐसे किसी भी बाहरी प्रतिबंध के सीधे प्रभाव से सुरक्षित रहता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि चीन डॉलर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देगा, बल्कि वह उस वित्तीय प्रणाली पर अपनी निर्भरता घटा रहा है जिस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों का दबदबा है।

सोना खरीदने की वैश्विक होड़

सोने की खरीदारी करने वाला चीन अकेला देश नहीं है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आँकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने इस साल जुलाई में 23 टन और अगस्त में लगभग 39 टन सोने की शुद्ध खरीदारी की। यह इस बात का संकेत है कि कई देश अपने निवेश में विविधता लाने और एक बहुध्रुवीय मौद्रिक प्रणाली की तैयारी के साधन के रूप में सोने को देख रहे हैं।

सोने में निवेश के जोखिम

हालांकि, लेख में यह भी बताया गया है कि एक आरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की कुछ सीमाएँ हैं। इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता और इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव भी हो सकता है। यह डॉलर जैसी नकदी या अमेरिकी ट्रेजरी बाजार जितनी गहराई भी प्रदान नहीं कर सकता। डॉलर के मज़बूत होने या वास्तविक ब्याज दरों में बढ़ोतरी से सोने की कीमतें गिर सकती हैं, इसलिए इस पर बहुत अधिक निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है।

इनपुट: IANS

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