कोलकाता भगदड़: CM सुवेंदु अधिकारी ने घायलों को निजी अस्पताल भेजने के फैसले का किया बचाव
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के चोरबगान पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के अपने प्रशासन के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया…
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के चोरबगान पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के अपने प्रशासन के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम मौतों का आँकड़ा बढ़ने से रोकने के लिए उठाया गया था और इसके बाद किसी भी घायल की जान नहीं गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढाँचे में कुछ कमियाँ हैं, जिन्हें सुधारने में लगभग दो साल लगेंगे।
यह घटना उत्तरी कोलकाता के चोरबगान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में पहली सप्तमी (शनिवार) की रात को हुई थी, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए। इस हादसे के बाद, 14 घायलों को एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था।
सरकार का पक्ष और भविष्य की तैयारी
मंगलवार को 'नवमी' की रात मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साल्ट लेक स्थित स्वास्थ्य भवन के कंट्रोल रूम का औचक दौरा किया। उनके साथ राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरदवत मुखर्जी भी मौजूद थे। वहाँ उन्होंने एक बड़ी स्क्रीन के माध्यम से राज्य भर के अस्पतालों की स्थिति और दुर्गा पूजा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का जायजा लिया। इसी दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हमने घायलों को तुरंत निजी अस्पतालों में भेजने का फैसला किया, ताकि मरने वालों की संख्या न बढ़े। इसके बाद मरने वालों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।"
सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर स्वीकरोक्ति
मुख्यमंत्री अधिकारी ने सरकारी अस्पतालों की खामियों को स्वीकार करते हुए कहा, "कुछ कमियां तो हैं। सरकारी अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को निजी अस्पतालों के स्तर तक बेहतर बनाने में दो साल लगेंगे। पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार बने अभी सिर्फ छह महीने ही हुए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की जाँच होनी चाहिए कि जो डॉक्टर मरीज़ों को रेफर करने की बात कर रहे थे, वे घटना के समय ड्यूटी पर थे भी या नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ड्यूटी छोड़कर जाना नियमों के खिलाफ और अमानवीय है।
घटना और उसके बाद की कार्रवाई
इस दुखद हादसे के बाद स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने पुलिस व प्रशासन पर भीड़ को संभालने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए गुस्सा जाहिर किया था। उन्होंने बचाव कार्यों में देरी की भी शिकायत की थी। इस मामले के संबंध में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इनपुट: IANS



