मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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चेन्नई: पोर्ट से मदुरवोयल तक एलिवेटेड कॉरिडोर का 22% काम पूरा, शहर को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में बंदरगाह को पश्चिमी उपनगरों से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना तेजी से आकार ले रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 5,600 करोड़ रुपये की…

चेन्नई: पोर्ट से मदुरवोयल तक एलिवेटेड कॉरिडोर का 22% काम पूरा, शहर को ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में बंदरगाह को पश्चिमी उपनगरों से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना तेजी से आकार ले रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 5,600 करोड़ रुपये की लागत वाली चेन्नई पोर्ट-मदुरवोयल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का लगभग 22 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बंदरगाह तक मालवाहक कंटेनर ट्रकों की आवाजाही को सुगम बनाना और शहर की व्यस्त सड़कों पर यातायात का दबाव कम करना है।

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यह 15.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर कूवम नदी के ऊपर बनाया जा रहा है, जो इसे देश की सबसे चुनौतीपूर्ण शहरी राजमार्ग परियोजनाओं में से एक बनाता है। अधिकारियों के मुताबिक, भारी बारिश के कारण सुरक्षा कारणों से पूर्वोत्तर मानसून के दौरान, यानी सितंबर से जनवरी तक, नदी के किनारे निर्माण कार्य रोक दिया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के मार्च 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

कई अन्य परियोजनाओं पर भी काम जारी

इसके अलावा, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है। इसी क्रम में, चेंगलपट्टू के पास कलंबक्कम से महिंद्रा सिटी तक एक एलिवेटेड रोड के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 3,186 करोड़ रुपये है। इस प्रस्तावित सड़क को चेन्नई मेट्रो रेल विस्तार परियोजना से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं, ताकि एक मल्टीमॉडल परिवहन नेटवर्क विकसित किया जा सके।

NHAI इसी वित्त वर्ष में 398 करोड़ रुपये की लागत से चेंगलपट्टू-तिंडीवनम राष्ट्रीय राजमार्ग को छह-लेन में बदलने की योजना भी बना रहा है। वहीं, 147 करोड़ रुपये के एक अन्य प्रोजेक्ट के तहत टिंडिवनम-पुडुचेरी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सात दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने का काम भी जल्द शुरू होगा।

टोल प्लाजा पर स्पष्टीकरण

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा आमतौर पर लगभग 60 किलोमीटर के अंतराल पर स्थापित किए जाते हैं। हालांकि, कुछ हिस्सों में वाहन चालकों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए इस दूरी के भीतर कम टोल प्लाजा बनाए जाते हैं, ताकि राजमार्गों का रखरखाव भी सुचारू रूप से चलता रहे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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