डिजिटल अरेस्ट: करोड़ों की धोखाधड़ी में शामिल 5 और आरोपी गिरफ्तार, CBI ने कसा शिकंजा
देश में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रही संगठित धोखाधड़ी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिलसिले में एजेंसी ने पांच और…
देश में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रही संगठित धोखाधड़ी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिलसिले में एजेंसी ने पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर पीड़ितों से ठगे गए करोड़ों रुपए जमा करने, उसे अलग-अलग खातों में घुमाने (मनी लॉन्ड्रिंग) और बांटने का आरोप है।
यह कार्रवाई सीबीआई के 'ऑपरेशन चक्र-6' का हिस्सा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू किया गया था। शीर्ष अदालत ने इन अपराधों के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए सीबीआई को इस सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया था। हाल ही में एजेंसी ने 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी, जिसके बाद ये नई गिरफ्तारियां हुई हैं।
कौन हैं नए गिरफ्तार आरोपी?
गिरफ्तार किए गए पांच लोगों की पहचान संकेत बस्तवार, पंकज दमाडे, आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि के रूप में हुई है। सीबीआई ने बताया कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या आठ हो गई है और इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच एजेंसी के अनुसार, मध्य प्रदेश के इटारसी के रहने वाले संकेत बस्तवार और पंकज दमाडे धोखाधड़ी से एक बैंक खाता हासिल कर उसमें 'डिजिटल अरेस्ट' से मिली रकम जमा कराते थे। बाद में पैसे के स्रोत को छिपाने के लिए उसे कई खातों में बांट देते थे।
वहीं, नई दिल्ली के आरिफ उर्फ किंग भाई व हरीश पुरुषोत्तम यादव और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के शशांक सिंह उर्फ रवि ने उस बैंक खाते का इंतजाम किया था, जिसमें पीड़ितों से पैसे लिए जाते थे। सीबीआई ने बताया कि इन तीनों ने खाताधारक के मोबाइल फोन में एक खतरनाक एपीके फाइल भी इंस्टॉल कर दी थी। इसकी मदद से वे बैंक के एसएमएस अलर्ट को बीच में ही रोककर चुपचाप खाते को संचालित करते थे।
एजेंसी के मुताबिक, इन गिरफ्तारियों से उस बड़े संगठित नेटवर्क का खुलासा हो रहा है, जिसका ये लोग हिस्सा थे, और यह भी पता चल रहा है कि यह नेटवर्क पैसे के लेन-देन को कैसे अंजाम देता था।
इनपुट: IANS



