असम: बोंगाईगांव मेडिकल कॉलेज इसी सत्र से 100 छात्रों को देगा दाखिला, स्वास्थ्य मंत्री ने किया निरीक्षण
असम में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। राज्य का नवनिर्मित बोंगाईगांव मेडिकल कॉलेज और अस्पताल इसी शैक्षणिक सत्र से 100 छात्रों के पहले बैच को प्रवेश देगा…
असम में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। राज्य का नवनिर्मित बोंगाईगांव मेडिकल कॉलेज और अस्पताल इसी शैक्षणिक सत्र से 100 छात्रों के पहले बैच को प्रवेश देगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह घोषणा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने शुक्रवार को कॉलेज के निरीक्षण के बाद की।
मंत्री सिंघल ने कॉलेज परिसर का दौरा कर इसके बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की समीक्षा की और अस्पताल के अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की। उन्होंने कहा कि इस मेडिकल कॉलेज को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ राज्य के सबसे तकनीकी रूप से उन्नत चिकित्सा संस्थानों में से एक के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
जल्द शुरू होंगी स्वास्थ्य सेवाएं
अशोक सिंघल ने बताया कि नवनिर्मित अस्पताल को जल्द ही औपचारिक रूप से जनता की सेवा के लिए खोल दिया जाएगा। इस सुविधा के शुरू होने से बोंगाईगांव और आसपास के जिलों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी। निरीक्षण और समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जल्द से जल्द पूरी तरह से काम करना शुरू कर दे।
बाढ़ और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी चर्चा
इस दौरे के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने ऊपरी असम में बाढ़ की स्थिति के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सरकार ने प्रभावित इलाकों के राहत शिविरों में पर्याप्त चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित की हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं, नर्सों और डॉक्टरों के योगदान की भी सराहना की।
सिंघल ने यह भी जानकारी दी कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा कि बुखार और खांसी जैसी सामान्य बीमारियों की दवाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध हैं, जबकि बाईपास सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को बेहतर सुविधाओं वाले मेडिकल कॉलेजों में भेजा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों से यह भी आग्रह किया कि वे मरीजों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए जहाँ तक संभव हो, जेनेरिक दवाएं ही लिखें।
इनपुट: IANS



