बिहार: गर्भवती पत्नी की हत्या में पति दोषी करार, दहेज के लिए गई थी जान
बिहार के बगहा की एक अदालत ने दहेज के लिए अपनी गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में पति को दोषी ठहराया है। अदालत इस महीने के आखिर में दोषी की सज़ा पर फैसला सुनाएगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
बिहार के बगहा की एक अदालत ने दहेज के लिए अपनी गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में पति को दोषी ठहराया है। अदालत इस महीने के आखिर में दोषी की सज़ा पर फैसला सुनाएगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सबूतों के अभाव में दोषी की माँ (सास) को बरी कर दिया गया है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी पाया। प्रमोद फिलहाल न्यायिक हिरासत में है और सज़ा की अवधि पर बहस के लिए 20 नवंबर 2026 की तारीख तय की गई है। सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) मनु राव ने बताया कि यह फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों और सबूतों के आधार पर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला पश्चिम चंपारण जिले के पिपरासी थाना क्षेत्र के चनकुहवा गांव का है। संध्या के पिता गर्भन यादव, जो उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले हैं, ने अपनी 23 वर्षीय बेटी की शादी 5 जून 2025 को प्रमोद यादव से की थी। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही प्रमोद और उसके परिवार वाले संध्या को दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। बताया गया कि प्रमोद ने संध्या के मायके जाकर अतिरिक्त दो लाख रुपये की मांग भी की थी।
यह मामला तब सामने आया जब 11 सितंबर 2025 को सुबह करीब चार बजे संध्या के परिवार को उसकी तबीयत खराब होने की सूचना मिली। जब वे उसके ससुराल पहुँचे, तो उन्होंने पाया कि संध्या की हत्या हो चुकी थी।
अदालती कार्यवाही और फैसला
इस घटना के बाद संध्या के पति प्रमोद यादव, सास लीलावती देवी, देवर और ननद के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। एपीपी मनु राव ने इस बात पर जोर दिया कि हत्या के समय संध्या गर्भवती थी, जिससे इस घटना में उसके अजन्मे बच्चे की भी मौत हो गई।
अदालत ने सुनवाई के बाद प्रमोद यादव को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) और 91 के तहत दोषी ठहराया, लेकिन अन्य आरोपों से बरी कर दिया। वहीं, उसकी सास लीलावती देवी को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
इनपुट: IANS



