बंगाल: 10 बागी विधायकों पर फैसला नहीं, तृणमूल कांग्रेस फिर पहुंची सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल में 10 बागी विधायकों की अयोग्यता के मामले में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा फैसला न लिए जाने पर तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेब…
पश्चिम बंगाल में 10 बागी विधायकों की अयोग्यता के मामले में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा फैसला न लिए जाने पर तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बोस पर निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 10 बागी विधायकों को प्रतिवादी बनाया गया है।
यह दूसरी बार है जब चट्टोपाध्याय इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे हैं। इससे पहले सितंबर में दायर उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 28 सितंबर को एक अहम टिप्पणी की थी। अदालत ने उम्मीद जताई थी कि अगर पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के सामने ऐसा कोई आवेदन आता है, तो वे तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने 8 जुलाई को इन विधायकों के खिलाफ पहला आवेदन विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा था। इस हिसाब से तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर को समाप्त हो गई। लेकिन, अध्यक्ष की ओर से कोई निर्णय न आने के बाद अब यह मामला फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उम्मीद है कि इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई हो सकती है। चट्टोपाध्याय दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत इन विधायकों को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।
किन विधायकों की अयोग्यता की मांग?
जिन 10 विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है, उनकी अगुवाई विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी कर रहे हैं। इस सूची में कोलकाता नगर निगम (KMC) के पूर्व महापौर फिरहाद हकीम का नाम भी शामिल है। अन्य बागी विधायकों में संदीपन साहा, अरूप रॉय, शिउली साहा, अख्तरुज्जमान, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान हैं। याचिका में विधानसभा के प्रधान सचिव को भी एक पक्ष बनाया गया है।
इनपुट: IANS



