मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को ₹1 लाख का अनुदान, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने की कई घोषणाएं

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की सभी सामुदायिक पूजा समितियों के लिए एक लाख रुपये के अनुदान की घोषणा की है। विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के…

बंगाल में दुर्गा पूजा समितियों को ₹1 लाख का अनुदान, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने की कई घोषणाएं
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की सभी सामुदायिक पूजा समितियों के लिए एक लाख रुपये के अनुदान की घोषणा की है। विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद सोमवार को यह ऐलान किया गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने बड़ी और आर्थिक रूप से सक्षम पूजा समितियों से स्वेच्छा से यह सहायता न लेने की अपील भी की है।

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मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "हम चाहते हैं कि यह एक लाख रुपए की सहायता उन समितियों तक पहुंचे, जो इस वित्तीय मदद के बिना पूजा का आयोजन करने में कठिनाई महसूस करती हैं।" शुरुआत में यह मदद केवल कम बजट वाली समितियों के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे सभी के लिए लागू कर दिया गया है।

पूजा के दौरान नियम और राहत

अनुदान के अलावा, मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि दुर्गा पूजा समितियों को बिजली बिल का भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा के दौरान राज्य में कहीं भी डीजे बजाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस वर्ष महाअष्टमी के अवसर पर 19 अक्टूबर को राज्य में 'ड्राई डे' रहेगा। इस दिन शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी और पब तथा बार में भी शराब परोसने पर पाबंदी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "महाअष्टमी बेहद पवित्र अवसर है। इस दिन हम मां दुर्गा को पुष्प अर्पित करते हैं, इसलिए हमने इसे ड्राई डे घोषित करने का फैसला किया है। पूजा हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए जिससे इसकी भावना आहत हो।"

पिछली सरकार पर निशाना

इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार में पूजा अनुदान राजनीतिक लाभ का एक जरिया बन गया था। उन्होंने कहा, "पिछले शासन में यह अनुदान लगभग एक तरह की राजनीतिक बोली प्रक्रिया का रूप ले चुका था, लेकिन यह रणनीति पिछले चुनावों में सफल नहीं हुई। इसके बजाय कई पूजा समितियां सरकारी अनुदान पर निर्भर हो गईं।"

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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