बंगाल निकाय चुनाव: कांग्रेस का अकेले चलने का फैसला, TMC और लेफ्ट के साथ गठबंधन से इनकार
पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले सात शहरी निकायों के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) ने साफ कर दिया है कि वह इन चुनावों में किसी भी दल के साथ सीटों…
पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले सात शहरी निकायों के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) ने साफ कर दिया है कि वह इन चुनावों में किसी भी दल के साथ सीटों का बंटवारा नहीं करेगी। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, कांग्रेस ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे, दोनों के साथ गठबंधन की संभावनाओं को खारिज कर दिया है।
पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की ओर से सीट-बंटवारे के लिए अनौपचारिक संकेत मिले थे। हालांकि, राज्य कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस प्रस्ताव पर विचार करने से इनकार कर दिया। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव किसी भी तरह के चुनावी प्रयोग के लिए सही मंच नहीं हैं।
क्यों अकेले चुनाव लड़ेगी कांग्रेस?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इस फैसले के पीछे की वजह बताई है। उनके अनुसार, "आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए किसी भी प्रकार का सीट साझा समझौता अर्थहीन होगा क्योंकि पिछले अनुभव बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल और राज्य प्रशासन के संयुक्त प्रभाव के कारण स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर एक औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "इस बार भी स्थिति अलग नहीं होगी और पूरी संभावना है कि इन सात नगर निकायों के अधिकांश वार्डों में भाजपा उम्मीदवार अपने प्रभाव का लाभ उठाकर जीत हासिल करेंगे। ऐसे में भाजपा यह दावा कर सकेगी कि संयुक्त विपक्ष के खिलाफ उसे जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन मिला है। इसलिए शहरी निकाय चुनाव सीट साझेदारी के प्रयोग के लिए उचित अवसर नहीं हैं।"
अन्य दलों का क्या है रुख?
कांग्रेस की तरह ही CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे ने भी अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। माकपा ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद, वह स्थानीय निकाय चुनावों में स्वतंत्र रूप से उतरेगी। पार्टी के एक केंद्रीय समिति सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट के साथ सीट साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही, इस समय कांग्रेस के साथ भी किसी प्रकार की समझदारी वांछनीय नहीं है क्योंकि हमारा मानना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव हमारी संगठनात्मक ताकत का आकलन करने का सबसे अच्छा अवसर हैं।"
वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' गुट ने भी अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है। दूसरी ओर, तृणमूल छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) बनाने वाला 20 लोकसभा सदस्यों का समूह भाजपा के साथ सीट बंटवारे का इच्छुक है। यह समूह खुद को NDA का हिस्सा बताता है।
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम समेत राज्य के सात शहरी निकायों में चुनाव नवंबर के आखिरी सप्ताह में प्रस्तावित हैं, जबकि वोटों की गिनती दिसंबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है।
इनपुट: IANS



