1993 कोलकाता फायरिंग: 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे सुवेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई 1993 को एक विरोध रैली के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत की जांच से जुड़ी एक अहम रिपोर्ट अब सार्वजनिक की जाएगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई 1993 को एक विरोध रैली के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत की जांच से जुड़ी एक अहम रिपोर्ट अब सार्वजनिक की जाएगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में यह घोषणा की है। यह घोषणा उस घटना की बरसी से ठीक एक दिन पहले आई है, जिसे तृणमूल कांग्रेस 'शहीद दिवस' के रूप में मनाती है।
यह जांच रिपोर्ट जस्टिस सुशांत चटर्जी कमीशन ने तैयार की थी। इस आयोग का गठन 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने ही किया था। सोमवार को बजट सत्र के दौरान सदन को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा कि वह इस रिपोर्ट को बंगाल की जनता के सामने रखेंगे।
जांच रिपोर्ट और उसके मायने
सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 2011 में सत्ता में आने के बाद '21 जुलाई आयोग' का गठन किया था। इसके प्रमुख जस्टिस सुशांत चटर्जी (सेवानिवृत्त) थे। मैं उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करूंगा।" उन्होंने आगे कहा, "इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि पिछली सरकार ने जस्टिस सुशांत चटर्जी (सेवानिवृत्त) की सिफारिशों को किस हद तक लागू किया और किस हद तक नहीं। मैं सबूतों के आधार पर बंगाल की जनता के सामने रिपोर्ट पेश करूंगा।"
क्या थी 21 जुलाई 1993 की घटना?
उस दिन तत्कालीन कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ तत्कालीन राज्य सचिवालय 'राइटर्स बिल्डिंग' तक एक विरोध मार्च का नेतृत्व किया था। उस समय ज्योति बसु पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे। पुलिस ने राइटर्स बिल्डिंग पहुंचने से पहले ही युवा कांग्रेस के जुलूस को रोक दिया था। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 13 कार्यकर्ता मारे गए थे।
तभी से ममता बनर्जी हर साल 21 जुलाई को उन कार्यकर्ताओं की याद में शहीद दिवस मनाती हैं। पहले वह कांग्रेस नेता के तौर पर और बाद में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के तौर पर यह आयोजन करती आ रही हैं। कांग्रेस भी इस दिन अलग से कार्यक्रम आयोजित करती है।
घटना से जुड़े विवाद
यह मामला विवादों से भी घिरा रहा है। जब यह पुलिस फायरिंग हुई थी, उस समय IAS अधिकारी मनीष गुप्ता पश्चिम बंगाल के गृह सचिव थे। हालांकि, बाद में गुप्ता 2011 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और ममता बनर्जी की कैबिनेट में मंत्री भी बने। वह तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य भी रहे, लेकिन हाल ही में उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला किया।
इनपुट: IANS



