बांग्लादेश में खसरे का कहर: टीकाकरण में कमी से 8 महीनों में 1100 से ज़्यादा मौतें
बांग्लादेश इस साल खसरे के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है, जहाँ मार्च के मध्य से अब तक 1,147 लोगों की जान जा चुकी है। इस संकट का मुख्य कारण नियमित टीकाकरण कवरेज में आई गिरावट को माना जा रहा है…
बांग्लादेश इस साल खसरे के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है, जहाँ मार्च के मध्य से अब तक 1,147 लोगों की जान जा चुकी है। इस संकट का मुख्य कारण नियमित टीकाकरण कवरेज में आई गिरावट को माना जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले आठ महीनों में देश में खसरे के 2,02,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए 'द जापान टाइम्स' ने बताया कि बांग्लादेश में इस साल किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इन कुल मामलों में से 22,000 की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के ज़रिए हुई है। चिंताजनक बात यह है कि इस बीमारी से मरने वालों में 94 प्रतिशत बच्चे पांच साल से कम उम्र के थे।
टीकाकरण कवरेज में गिरावट बनी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए 95 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज ज़रूरी होता है, जिसे 'हर्ड इम्युनिटी' कहते हैं। बांग्लादेश हाल के वर्षों में इस लक्ष्य के करीब पहुँच गया था, लेकिन 2025 में इसमें गिरावट दर्ज की गई। WHO और यूनिसेफ के अनुमानों के मुताबिक, 2025 में खसरे की पहली खुराक का कवरेज घटकर 90 प्रतिशत और दूसरी खुराक का 86 प्रतिशत रह गया, जो कि आवश्यक स्तर से काफी कम है।
प्रशासनिक कमज़ोरियाँ और अधूरे आँकड़े
इस संकट के पीछे टीकाकरण में कमी के अलावा कमज़ोर आँकड़े और लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुँच भी बड़े कारण हैं। यूनिसेफ और बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, देश में 40 प्रतिशत बच्चों का पंजीकरण ही नहीं हुआ है। वहीं, सरकारी आँकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य कर्मियों के लगभग एक-तिहाई पद खाली पड़े हैं, जिससे दूर-दराज़ के इलाकों तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती है। गलत आँकड़ों के कारण बांग्लादेश की आपातकालीन स्थितियों से निपटने की क्षमता भी प्रभावित हुई, जिससे लाखों बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए।
मामले अब भी बढ़ रहे
प्रकोप की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सितंबर में बांग्लादेश में प्रतिदिन औसतन 1,198 नए मामले सामने आए, जो मई के बाद से सबसे ज़्यादा हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से पाँच साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए भी टीकाकरण अभियान का विस्तार करने का आग्रह किया है, क्योंकि कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी आयु वर्ग में पाया गया है।
इनपुट: IANS



