शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश का बैंकिंग संकट: डूबे कर्ज़ के मामले में दुनिया में सिर्फ यूक्रेन से पीछे

बांग्लादेश का बैंकिंग सेक्टर एक गंभीर संकट से जूझ रहा है, जहाँ बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज़ का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गैर-निष्पादित ऋण (NPL) या डूबे हुए कर्ज़ में तब्दील हो चुका है। समाचार एजेंसी IANS के

बांग्लादेश का बैंकिंग संकट: डूबे कर्ज़ के मामले में दुनिया में सिर्फ यूक्रेन से पीछे
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश का बैंकिंग सेक्टर एक गंभीर संकट से जूझ रहा है, जहाँ बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज़ का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गैर-निष्पादित ऋण (NPL) या डूबे हुए कर्ज़ में तब्दील हो चुका है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में बांग्लादेश अब युद्धग्रस्त यूक्रेन के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर ऋण अनुशासन, राजनीतिक प्रभाव में बांटे गए कर्ज़ और वसूली की लचर व्यवस्था ने देश की बैंकिंग प्रणाली को इस स्थिति में पहुँचा दिया है। इन कारणों से दक्षिण एशियाई (सार्क) देशों में भी बांग्लादेश की हालत सबसे खराब बताई गई है।

डूबे कर्ज़ के वैश्विक और स्थानीय आँकड़े

आँकड़ों पर नज़र डालें तो 37.35 प्रतिशत NPL अनुपात के साथ यूक्रेन इस सूची में पहले स्थान पर है। इसके ठीक बाद बांग्लादेश 32.26 प्रतिशत के साथ दूसरे, चाड (31.51%) तीसरे और गिनी (31.15%) चौथे पायदान पर है।

बांग्लादेश बैंक के डेटा के अनुसार, देश में मार्च 2026 के अंत तक डूबे हुए कर्ज़ की रक़म बढ़कर 5.89 लाख करोड़ टका हो गई। यह महज़ तीन महीनों के भीतर 31,000 करोड़ टका की भारी वृद्धि को दर्शाता है। देश में कुल बकाया ऋण 18.25 लाख करोड़ टका है। यदि पुनर्गठित और विशेष निगरानी वाले कर्ज़ को भी शामिल कर लिया जाए, तो संकटग्रस्त संपत्ति बढ़कर 11.2 लाख करोड़ टका तक पहुँच जाती है, जो कुल बैंकिंग ऋण का लगभग 61 प्रतिशत है।

राजनीतिक प्रभाव और घटती पूँजी

रिपोर्ट में बैंकिंग अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा गया है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण कर्ज़ चुकाने की क्षमता के बजाय व्यक्तिगत या राजनीतिक संबंधों के आधार पर ऋण स्वीकृत किए गए, जिससे बैंकिंग मानक कमज़ोर हुए। इस संकट का असर बैंकों की पूँजी पर भी पड़ा है। कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो (CRAR) वर्ष 2025 के अंत तक घटकर -2.64 प्रतिशत पर आ गया, जबकि एक साल पहले यह 3.08 प्रतिशत था। यह 12.5 प्रतिशत की नियामकीय न्यूनतम सीमा से बहुत नीचे है।

इसके विपरीत, पड़ोसी देशों की स्थिति कहीं बेहतर है। पाकिस्तान का CRAR 20.8%, श्रीलंका का 19.4% और भारत का 17.2% दर्ज किया गया। एनआरबीसी बैंक के एमडी और सीईओ एमडी तौहीदुल आलम खान ने स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि पड़ोसी देशों ने सख्त वित्तीय अनुशासन से अपने बैंकिंग क्षेत्र को सुरक्षित रखा, जबकि बांग्लादेश लगातार झटके झेलता रहा।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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