सोमवार, 3 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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सलमान रुश्दी ने अदालत में सुनाई हमले की भयावह दास्तान, कहा - 'मेरे चारों ओर खून का तालाब था'

मशहूर लेखक सलमान रुश्दी ने 2022 में उन पर हुए जानलेवा हमले को याद करते हुए पहली बार अदालत में गवाही दी है। उन्होंने उस भयावह मंज़र को बयान किया जब न्यूयॉर्क में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर…

सलमान रुश्दी ने अदालत में सुनाई हमले की भयावह दास्तान, कहा - 'मेरे चारों ओर खून का तालाब था'
(फोटो: IANS)

मशहूर लेखक सलमान रुश्दी ने 2022 में उन पर हुए जानलेवा हमले को याद करते हुए पहली बार अदालत में गवाही दी है। उन्होंने उस भयावह मंज़र को बयान किया जब न्यूयॉर्क में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर ही उन पर चाकू से लगातार वार किए गए, जिसमें उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, रुश्दी ने जूरी को बताया, "मैं मंच पर पड़ा था और मेरे चारों ओर खून का एक बड़ा तालाब था।"

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यह गवाही हमलावर हादी मतर के खिलाफ चल रहे संघीय आतंकवाद के मुकदमे के दौरान दी गई। रुश्दी ने बताया कि हमलावर उन पर चढ़ा हुआ था और लगातार चाकू से वार कर रहा था, जबकि वह वहां से हटने की कोशिश कर रहे थे। गौरतलब है कि लेबनानी मूल के 28 वर्षीय अमेरिकी नागरिक हादी मतर को पहले ही न्यूयॉर्क की राज्य अदालत में हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया जा चुका है और वह 25 साल की सजा काट रहा है।

आतंकवाद का आरोप और बचाव पक्ष की दलील

अब बफेलो की संघीय अदालत में मतर पर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े आरोपों के तहत मुकदमा चल रहा है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि मतर ने ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी द्वारा 1989 में जारी फतवे पर अमल करने की कोशिश की थी। इस फतवे में रुश्दी की किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' को ईशनिंदा बताकर उनकी हत्या का आह्वान किया गया था। वहीं, मतर के वकील का तर्क है कि उनके मुवक्किल ने किसी संगठन के लिए नहीं, बल्कि एक 'भड़के हुए मुसलमान' के तौर पर अकेले ही इस घटना को अंजाम दिया।

हमले का शारीरिक और मानसिक असर

79 वर्षीय रुश्दी ने अदालत में हमले से हुए नुकसान का भी जिक्र किया। अभियोजक के अनुरोध पर उन्होंने अपना विशेष चश्मा उतारकर जूरी को अपनी क्षतिग्रस्त आंख दिखाई। उन्होंने बताया कि हमले में उनकी दाहिनी आंख चली गई, उनका बायां हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया जिससे वह अब गाड़ी नहीं चला सकते, और उनके लिवर को भी नुकसान पहुंचा। विडंबना यह है कि जिस कार्यक्रम में उन पर हमला हुआ, वहां वह लेखकों की सुरक्षा के विषय पर ही बोलने वाले थे। रुश्दी ने इस हमले के अपने अनुभव पर "नाइफ: मेडिटेशंस आफ्टर एन अटेम्प्टेड मर्डर" नाम से एक किताब भी लिखी है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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