संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों पर भारत का कड़ा ऐतराज, कहा- सुनी-सुनाई बातों से विश्वसनीयता घट रही है
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि मनगढ़ंत और बिना पुष्टि वाली जानकारी के आधार पर तैयार की गईं रिपोर्टें वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को कम कर…
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि मनगढ़ंत और बिना पुष्टि वाली जानकारी के आधार पर तैयार की गईं रिपोर्टें वैश्विक संस्था की विश्वसनीयता को कम कर रही हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भारत ने यह आपत्ति संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक के दौरान 'शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता' पर आधारित एक विशेष रिपोर्ट को लेकर दर्ज कराई है।
न्यूयॉर्क में हुई इस बैठक में भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक जीना रोमेरो की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि गुमनाम और अप्रमाणित आरोपों के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के खिलाफ व्यापक आरोप लगाना सबूत नहीं माना जा सकता। स्वरूप ने कहा, "इसी तरह की मनमानी रिपोर्टिंग की वजह से संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी संस्थाओं की विश्वसनीयता कम हो रही है।"
किस रिपोर्ट पर था विवाद?
जीना रोमेरो की रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि भारत के कुछ युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय जैसे मुद्दों पर बोलने के कारण विरोध या सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस दावे के स्रोत के रूप में केवल एक 'सबमिशन' का उल्लेख था, जिसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। इस पर अनुज स्वरूप ने कहा, "जब कोई पदाधिकारी गुमनाम सूचनाओं के आधार पर 1.4 अरब लोगों के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी के साथ न्याय नहीं करता।"
भारत ने गिनाए लोकतंत्र के उदाहरण
अपनी बात रखते हुए अनुज स्वरूप ने भारत में लोकतांत्रिक संवाद के कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने सवाल किया, "किस दमनकारी देश में कोई व्यंग्यात्मक युवा पार्टी सरकार से सवाल पूछ सकती है, राजधानी तक मार्च कर सकती है और फिर देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर बातचीत कर सकती है?" यह टिप्पणी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संदर्भ में मानी जा रही है।
उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। स्वरूप ने बताया कि सरकार ने युवाओं के साथ रचनात्मक बातचीत की और कुछ ही हफ्तों में संसद ने सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम में संशोधन कर दिया, जिसमें पेपर लीक के लिए सज़ा बढ़ाने से लेकर फास्ट-ट्रैक अदालतों तक के प्रावधान किए गए।
दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप
इसी सप्ताह यह दूसरा मौका था जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था पर सवाल उठाए। इससे पहले बुधवार को अनुज स्वरूप ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि भारत के पड़ोसी देशों और पश्चिमी देशों में प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाइयों का जिक्र अक्सर रिपोर्टों में नहीं किया जाता, जिससे लोगों का भरोसा कम होता है।
इनपुट: IANS



