आंध्र प्रदेश में अल नीनो का असर: बारिश में 50% की कमी, मुख्यमंत्री ने दिए कीमतों पर काबू पाने के निर्देश
आंध्र प्रदेश इस समय अल नीनो के प्रभाव से जूझ रहा है, जिसके कारण पूरे राज्य में बारिश में 50.7 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इसे एक…
आंध्र प्रदेश इस समय अल नीनो के प्रभाव से जूझ रहा है, जिसके कारण पूरे राज्य में बारिश में 50.7 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इसे एक चुनौती के तौर पर स्वीकार करने और इसके असर से निपटने के लिए तत्काल योजनाएं लागू करने का आह्वान किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, रविवार को हुई एक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संकट का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा।
राज्य में खरीफ सीजन के दौरान 30.84 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की योजना थी, लेकिन सूखे जैसे हालात के कारण केवल 79 प्रतिशत जमीन पर ही बुवाई शुरू हो सकी है। प्रकाशम, अन्नमय्या और सत्य साईं जिलों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा देखी गई है। हालांकि, दालों की खेती संतोषजनक बताई जा रही है, लेकिन तिलहन का रकबा काफी कम है।
किसानों की मदद और मूल्य नियंत्रण के उपाय
मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों के साथ एक टेलीकांफ्रेंस में किसानों की हरसंभव मदद करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने चावल, प्याज, पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। नायडू ने कहा, “हमने अल-नीनो की स्थिति का पहले ही अंदाजा लगा लिया था। सभी को पहले से तैयार एक्शन प्लान के मुताबिक काम करना चाहिए।”
उन्होंने अधिकारियों को चावल के स्टॉक की जांच करने और कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बाजार में अतिरिक्त स्टॉक जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही, भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए प्याज की खेती को बढ़ावा देने और पाम ऑयल व अरहर दाल की कीमतों को लेकर पहले लिए गए फैसलों को तेजी से लागू करने को कहा।
फसल बीमा और बागवानी पर जोर
किसानों को राहत देने के उपायों पर चर्चा करते हुए चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “हमने फसल बीमा का इंतजाम किया है। अगर फसल का नुकसान होता है, तो हमें यह पक्का करना होगा कि बीमा का पैसा किसानों तक पहुंचे।” उन्होंने ज्यादा जोखिम वाले रायथु सेवा केंद्र (RSK) इलाकों में बागवानी फसलों की मदद के लिए आवंटित फंड का सही इस्तेमाल करने की भी सलाह दी।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने सब्जियों की कीमतों को काबू में रखने के लिए स्वयं-सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से किचन गार्डन को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आपदा के समय जनता पर बुरा असर न पड़ने दे और यह सुनिश्चित करे कि अधिकारियों की लापरवाही से किसानों और ग्राहकों को परेशानी न हो।
इनपुट: IANS



