दुर्गा पूजा 'नकली पास' घोटाला: 16 घंटे की छापेमारी के बाद पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन को ED का समन
पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री और गायक से नेता बने इंद्रनील सेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ के लिए तलब किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में…
पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री और गायक से नेता बने इंद्रनील सेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ के लिए तलब किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके आवास पर 16 घंटे से अधिक चली मैराथन छापेमारी के बाद भेजा गया है। ईडी ने उन्हें बुधवार सुबह 11 बजे कोलकाता के साल्टलेक स्थित अपने कार्यालय में पेश होने को कहा है।
सेन पर लगे आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही, उन्होंने खुद को और अपने परिवार को परेशान किए जाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की धमकी भी दी है। ईडी की विभिन्न टीमों ने मंगलवार को एक साथ दस ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में सेन और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन का आवास भी शामिल था। इसके अलावा सेन के कुछ रिश्तेदारों और एक इवेंट मैनेजर अरिजीत दासगुप्ता के घर पर भी छापेमारी हुई।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कोलकाता की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा से जुड़ा है, जिसे 2021 में यूनेस्को से सांस्कृतिक विरासत की मान्यता मिली थी। ईडी के अनुसार, इस मान्यता का गलत इस्तेमाल करते हुए 'मास आर्ट' नामक एक संस्था बनाई गई, जिसने खुद को यूनेस्को का 'आधिकारिक पार्टनर' बताया। आरोप है कि सेन की पत्नी मधुछंदा इस संस्था से गहराई से जुड़ी थीं।
इसी संस्था ने दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' या पूजा परिक्रमा के नाम पर यूनेस्को के नाम और लोगो का अवैध रूप से इस्तेमाल करते हुए ऊंची कीमतों पर एंट्री पास या टिकट बेचे। जांच एजेंसी का अनुमान है कि इस तरह करीब 60 करोड़ रुपये की धांधली की गई है। ईडी ने इस मामले की जांच जून में बो बाजार पुलिस स्टेशन में जॉयदीप मुखर्जी नामक एक पीड़ित की शिकायत के आधार पर शुरू की थी।
कैसे हुआ कथित घोटाला?
आरोपों के मुताबिक, कोलकाता की करीब 24 दुर्गा पूजाओं के 'प्रीव्यू शो' के लिए 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक की ऊंची कीमतों पर पास बेचे गए। संस्था ने दावा किया था कि इन 24 पूजा पंडालों को यूनेस्को ने चुना है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस दावे में अब तक कोई सच्चाई नहीं पाई गई है।
शुरुआती जांच से पता चला है कि इन पासों के लिए 2022 में लगभग 19,000 लोगों ने पंजीकरण कराया था। यह संख्या 2023 में बढ़कर 34,000 और 2024 में 61,000 हो गई, जिससे बड़े पैमाने पर पैसे के गबन का शक पैदा हुआ है।
इनपुट: IANS



