भर्ती में AI का बढ़ता दबदबा: 86% भारतीय कंपनियों ने माना, बदल रहे हैं नौकरी देने के तरीके
भारत में नौकरियां देने और कैंपस से प्रतिभाएं चुनने का तरीका तेजी से बदल रहा है, और इस बदलाव के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि लगभग 86 प्रतिशत भारतीय संगठन…
भारत में नौकरियां देने और कैंपस से प्रतिभाएं चुनने का तरीका तेजी से बदल रहा है, और इस बदलाव के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि लगभग 86 प्रतिशत भारतीय संगठन यह मानते हैं कि AI उनकी भर्ती प्रक्रियाओं में एक बड़ा परिवर्तन ला रही है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां अब केवल डिग्री देखने के बजाय कौशल और तकनीकी ज्ञान को अधिक महत्व दे रही हैं।
यह जानकारी डेलॉइट इंडिया की 'कैंपस वर्कफोर्स ट्रेंड्स 2026' रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट बताती है कि कैंपस भर्ती अब पहले से कहीं ज़्यादा रणनीतिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और कौशल-आधारित हो गई है। कंपनियां शुरुआती करियर के लिए प्रतिभाशाली युवाओं को आकर्षित करने पर पहले से अधिक निवेश कर रही हैं।
बजट बढ़ा, AI का इस्तेमाल बढ़ा
इस बदलाव का एक बड़ा संकेत भर्ती बजट में 19 प्रतिशत की वृद्धि है। साथ ही, 80 प्रतिशत संगठनों ने अब कैंपस भर्ती के लिए समर्पित टीमें बना ली हैं। AI का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल रिज्यूमे की स्क्रीनिंग में हो रहा है, जहाँ 72 प्रतिशत कंपनियां इस तकनीक पर भरोसा कर रही हैं। इसके अलावा उम्मीदवारों के मूल्यांकन और संवाद में भी इसका उपयोग बढ़ा है। AI के बढ़ते प्रभाव के कारण नई तरह की एंट्री-लेवल नौकरियों और नए कौशलों की मांग भी पैदा हो रही है। 35% संगठनों ने यह माना है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025 में सिर्फ 21% था।
AI स्किल्स वालों को मिलेगा ज़्यादा वेतन
रिपोर्ट के अनुसार, जिन उम्मीदवारों के पास AI और डेटा से जुड़े कौशल हैं, उन्हें भर्ती के दौरान 20 से 25 प्रतिशत तक ज़्यादा वेतन मिल सकता है। वहीं, विश्लेषणात्मक सोच और समस्या-समाधान जैसे कौशल रखने वाले उम्मीदवारों को भी 10 से 15 प्रतिशत का अतिरिक्त वेतन प्रीमियम मिलने की संभावना है। हालांकि, वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच वेतन वृद्धि की औसत वार्षिक दर 2 से 4 प्रतिशत ही रही है।
इंटर्नशिप और नौकरी छोड़ने की दर पर असर
अध्ययन में यह भी पाया गया कि इंटर्नशिप अब स्थायी नौकरी पाने का एक ज़्यादा प्रभावी ज़रिया बन रही है। कंपनियों का कहना है कि वे किसी इंटर्न को स्थायी नौकरी देते समय उसकी व्यवहारिक दक्षता (75%) और सीखने की क्षमता (72%) को सबसे ज़्यादा महत्व देती हैं। बेहतर प्रतिभा चयन के कारण शुरुआती स्तर पर नौकरी छोड़ने वालों की संख्या में भी कमी आई है। शीर्ष संस्थानों से भर्ती हुए कर्मचारियों में यह दर 18 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गई है।
कार्यस्थल पर लैंगिक विविधता
लैंगिक विविधता के मोर्चे पर भी सकारात्मक प्रगति हुई है। वित्त वर्ष 2026 के लिए कैंपस भर्ती लक्ष्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कार्यस्थलों पर बढ़ती समावेशिता का प्रतीक है। रिपोर्ट का सार यह है कि कंपनियां अब सिर्फ बड़ी संख्या में भर्ती नहीं कर रही हैं, बल्कि ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दे रही हैं जो भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में सफल हो सकें।
इनपुट: IANS



