दिल्ली के 3 लैंडफिल साइट से हटाए गए कचरे के पहाड़, 100 एकड़ ज़मीन प्रदूषण मुक्त हुई: मुख्यमंत्री
दिल्ली को दशकों से परेशान कर रहे कचरे के पहाड़ों को हटाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को बताया कि शहर की तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों — ओखला, भलस्वा और गाजीपुर…
दिल्ली को दशकों से परेशान कर रहे कचरे के पहाड़ों को हटाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को बताया कि शहर की तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों — ओखला, भलस्वा और गाजीपुर — से वैज्ञानिक तरीके से करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे का निपटान किया जा चुका है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल सफाई अभियान के बाद लगभग 100 एकड़ ज़मीन को कचरा-मुक्त करा लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को दिल्ली के लोगों के लिए एक बड़ी राहत बताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने इन कचरे के पहाड़ों को हटाने का जो वादा किया था, उसे एक तय समय-सीमा और वैज्ञानिक रोडमैप के साथ पूरा करने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा फायदा उन इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को मिलेगा, जिन्हें अब एक साफ-सुथरा और बेहतर माहौल मिल सकेगा।
किस साइट से कितना कचरा हटा?
आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज़्यादा कचरा भलस्वा लैंडफिल साइट से हटाया गया है।
- भलस्वा: यहां से लगभग 102 लाख मीट्रिक टन कचरे का निपटान कर 45 एकड़ ज़मीन खाली कराई गई।
- ओखला: यहां से करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरा हटाकर 35 एकड़ ज़मीन मुक्त हुई।
- गाजीपुर: इस साइट से लगभग 44 लाख मीट्रिक टन कचरे का निपटान किया गया, जिससे 20 एकड़ ज़मीन वापस हासिल हुई।
भविष्य की योजना और कचरे का उपयोग
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान सिर्फ़ मौजूदा कचरे को हटाने पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, यह सुनिश्चित करने पर भी है। उन्होंने बताया कि कचरे के निपटान के बाद मिली बेकार सामग्री (इनर्ट मटीरियल) का इस्तेमाल निचले इलाकों को भरने और सड़कों का आधार तैयार करने जैसे कामों में किया जा रहा है।
इसके अलावा, दिल्ली में कचरे से ऊर्जा बनाने वाले (वेस्ट-टू-एनर्जी) चार नए प्लांट लगाने की तैयारी भी पूरी हो चुकी है। सीएम ने कहा, "जब ये प्लांट तैयार हो जाएंगे, तो दिल्ली में रोजाना पैदा होने वाले कचरे को उसी दिन प्रोसेस करने की क्षमता विकसित हो जाएगी।" इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में कचरे के नए पहाड़ न बनें।
इनपुट: IANS



