हिमाचल प्रदेश: मानसून की भारी मार, ₹1000 करोड़ का नुकसान और 15 लोगों की मौत
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून की बारिश कहर बनकर टूटी है, जिससे अब तक करीब 1000 करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण राज्य में जन-जीवन…
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून की बारिश कहर बनकर टूटी है, जिससे अब तक करीब 1000 करोड़ रुपये के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और बाढ़ के कारण राज्य में जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में अब तक लगभग 15 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें कांगड़ा और पांगी घाटी में हुई मौतें भी शामिल हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि प्रदेश भर में प्राकृतिक आपदाओं की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 19 अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड), 4 बादल फटने और 9 से 10 भूस्खलन की प्रमुख घटनाएं शामिल हैं। इस वजह से राज्य की आधारभूत संरचना को भारी क्षति पहुंची है।
बुनियादी सुविधाओं पर असर
प्राकृतिक आपदाओं का सीधा असर सड़कों, पानी और बिजली की आपूर्ति पर पड़ा है। पुष्पेंद्र राणा के मुताबिक, वर्तमान में प्रदेश में 120 से अधिक सड़कें यातायात के लिए बंद हैं, जिससे आवागमन में भारी मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा, 60 से अधिक पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई है। उन्होंने कहा, "राज्य में अभी तक का नुकसान लगभग एक हजार करोड़ है। हम कोशिश कर रहे हैं कि पूरा रिकॉर्ड रखें।"
प्रशासन की तैयारी और जनता से अपील
पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और तत्काल कार्रवाई कर रहा है। मौसम विभाग द्वारा जारी किए जा रहे सभी अलर्ट जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाए जा रहे हैं ताकि समय पर राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने प्रदेशवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे मानसून के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और आपदा संभावित क्षेत्रों में न जाएं। साथ ही, उन्होंने मौसम विभाग की चेतावनियों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया। किसी भी आपात स्थिति के लिए राज्य और जिला प्रशासन की हेल्पलाइन सेवाएं 24 घंटे सक्रिय हैं।
इनपुट: IANS



