Gas Shortage : गैस की किल्लत ने पलायन करने पर किया मजबूर, अभ्यर्थियों ने बताया दर्द; कहा- घर लौटना अब मजबूरी h3>
राजधानी पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस सिलिंडर के रिफिलिंग नहीं होने का संकट अब इन अभ्यर्थियों पर पूर्ण रूप से मंडराने लगा है। हालत ऐसी हो गई कि अभ्यर्थी इस आर्थिक बोझ से निबटने के लिए अब पटना से अपने घर के लिए पलायन करने लगे हैं। इधर पटना प्रशासन गैस की कमी को सिरे से नकार रहा है।
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इस संबंध में भोजपुर जिले के गड़हनी निवासी शेखर भट्ट का कहना है कि मेरे कई साथी गैस की किल्लत से परेशान होकर घर चले गए। मेरा गैस अभी चल रहा है, लेकिन गैस ख़त्म होते ही मैं भी घर चला जाऊंगा, क्यों कि 600 रुपए में गैस भरवाने से बेहतर है कि घर चला जाऊं। यह आर्थिक बोझ सहन करना बहुत ही मुश्किल है। वहीं शेखर भट्ट के अन्य साथी ने बताया कि पास में एक खुदरा गैस विक्रेता 600 रुपए प्रति किलो बेच रहा था, अब कुछ दिन से दूकान बंद कर गायब है। वैसे भी हमलोग इतना अमीर तो हैं नहीं कि 600 रुपए प्रति किलो गैस भरवाकर खाना बनाएं। अब तो खुदरा गैस मिल भी नहीं रहा है। अब कल घर जाने का प्रोग्राम बन गया है।
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वहीं रजनीश का कहना है कि यह आपदा का समय है लेकिन गैस रिफिलिंग की कालाबाजारी करने वालों के लिए यह अवसर है। वह गैस रिफिलिंग के नाम पर छात्रों से मनमाना रुपया वसूल रहे हैं। हमलोग इतना रुपया खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं। पूर्वी चंपारण के प्रेमचन्द्र कुमार का कहना है कि एक बार और देखेंगे, अगर गैस का मूल्य कम नहीं हुआ तो वापस घर लौटना पड़ेगा। वहीं भोजपुर के बिहिया निवासी मीरा का कहना है कि गैस की किल्लत में इंडेक्सन या हीटर तो कोई जलाने देगा नहीं। ऐसे में घर वापस लौटना ही एक मात्र विल्कप है।
इसके साथ साथ हॉस्टल और होटल संचालक भी परेशान हैं। गैस सिलेंडर नहीं मिलने से कई जगह किचन संचालन प्रभावित हो गया है। हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। शहर में करीब तीन हजार हॉस्टल इस समस्या से जूझ रहा है। इसका असर लगभग ढाई लाख छात्रों पर पड़ सकता है जो इन हॉस्टलों में रहते हैं। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है।

