फ्रांस: हिंसक प्रदर्शनों पर राष्ट्रपति मैक्रों का कड़ा रुख, बोले – नुक़सान करने वालों से ही होगी भरपाई
फ्रांस में महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों समेत कई मुद्दों पर हुए देशव्यापी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है, जिसके बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया है कि…
फ्रांस में महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों समेत कई मुद्दों पर हुए देशव्यापी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है, जिसके बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने और लूटपाट करने वालों से ही इसकी भरपाई कराई जाएगी। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के हवाले से मैक्रों ने कहा कि व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश करने वालों को अपने किए का जवाब देना होगा।
शनिवार को पूरे फ्रांस में लगभग 5.5 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इन प्रदर्शनों में किसान, जलवायु कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन सदस्य और छात्र शामिल थे, जो ईंधन की कीमतों, बढ़ती महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे।
हिंसा पर सरकार का एक्शन प्लान
टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा, "जिन लोगों ने नुकसान पहुंचाया है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। जिन्होंने लूटपाट की है, उन्हें उसका हर्जाना भरना होगा।" उन्होंने हिंसा से प्रभावित पुलिसकर्मियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों के साथ सरकार के खड़े होने का भरोसा दिया। IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को एक विशेष संकट प्रबंधन बैठक की अध्यक्षता करेंगे, ताकि प्रभावितों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जा सके।
खुफिया तंत्र की समीक्षा के निर्देश
राष्ट्रपति ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को शनिवार की घटनाओं से सबक लेने का निर्देश दिया है। उन्होंने विशेष रूप से खुफिया जानकारी जुटाने और पहले से तैयारी करने की व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा है, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इन हिंसक घटनाओं के दौरान 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के सदस्य घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर बताई गई है।
छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों से संवाद की पहल
मैक्रों ने स्वीकार किया कि प्रदर्शनों के पीछे महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि हाल के हफ्तों में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों द्वारा जताई गई चिंताओं को वह समझते हैं। सरकार आने वाले दिनों में छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और अन्य संगठनों से बातचीत कर युवाओं की समस्याओं का समाधान खोजेगी। गौरतलब है कि सितंबर से ही फ्रांस में छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर कई बड़े प्रदर्शन कर चुके हैं।
इनपुट: IANS



