फ्रांस में प्रदर्शनों पर ईरानी बयान से भड़का इजरायल, कहा- प्रदर्शनकारियों को फांसी देने वाला देश दे रहा ज्ञान
फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की टिप्पणी ने एक नया राजनयिक विवाद खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इजरायल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा…
फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की टिप्पणी ने एक नया राजनयिक विवाद खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इजरायल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जो देश अपने ही नागरिकों को फांसी देता है, वह अब फ्रांस को प्रदर्शन की आजादी पर 'भाषण' दे रहा है।
यह पूरा विवाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर किए गए एक पोस्ट से शुरू हुआ। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर निशाना साधते हुए कहा था कि फ्रांस के लोग बड़े पैमाने पर बदलाव चाहते हैं, जिसमें शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने की आजादी भी शामिल है।
इजरायल का कड़ा पलटवार
ईरान के इस बयान पर इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "ईरान के विदेश मंत्री फ्रांस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। जो सरकार अपने ही देश में प्रदर्शन करने वालों को फांसी देती है और विदेशों में आतंकवाद फैलाने के आरोप झेलती है, वही अब पेरिस को 'सभा और प्रदर्शन की आजादी' पर भाषण दे रही है।"
गिदोन सार ने ईरान को उसके अपने रिकॉर्ड की याद दिलाते हुए आगे लिखा, "लोग अभी तक यह नहीं भूले हैं कि जनवरी में ईरानी सरकार ने अपने ही हजारों नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। इसके अलावा, दमन, हिंसा और फांसी जैसी घटनाएं आज भी जारी हैं।"
ईरान ने मैक्रों को क्या कहा था?
अब्बास अराघची ने फ्रांस की मौजूदा स्थिति के लिए सीधे तौर पर राष्ट्रपति मैक्रों को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "मैक्रों ने खुद ही यह स्थिति पैदा की थी, जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि उन्हें ईरानियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर कोई आपत्ति नहीं है। अब उस युद्ध के लिए दूसरों को दोष देने में बहुत देर हो चुकी है, जिसे उनके जैसे लोगों ने पैदा करने में मदद की थी।" अराघची ने मैक्रों को सलाह दी, "मिस्टर राष्ट्रपति, फ्रांस के भविष्य की आवाज को सुनिए।"
इससे पहले, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने भी मैक्रों को जनवरी में ईरान में हुए प्रदर्शनों के दौरान 'प्रदर्शन के अधिकार' पर दिए गए उनके ही बयान की याद दिलाई थी। बाघेई ने सवाल किया कि ईरान और फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।
इनपुट: IANS



