अल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, PMO ने की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा
खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियों की समीक्षा तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी सिलसिले में मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में
खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियों की समीक्षा तेज कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी सिलसिले में मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने की। इस बैठक में मानसून की प्रगति और अल नीनो से निपटने के लिए विभिन्न मंत्रालयों द्वारा की गई तैयारियों का जायजा लिया गया।
बैठक में 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें कृषि, बिजली, सहकारिता, पेयजल, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) प्रमुख थे।
मानसून और अल नीनो का पूर्वानुमान
बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश में बारिश की स्थिति पर जानकारी दी। IMD के महानिदेशक ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मानसून लगभग 10 दिन देरी से पहुंचा। हालांकि, जुलाई के पहले हफ्ते में हुई अच्छी बारिश के बाद 7 जुलाई तक देशभर में वर्षा की कुल कमी घटकर माइनस 12 प्रतिशत रह गई है।
IMD के मुताबिक, जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि अल नीनो वाले हर साल में बारिश सामान्य से कम हो, यह जरूरी नहीं है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि मानसून की कुल बारिश का 30% से अधिक हिस्सा अकेले जुलाई में ही होता है।
कृषि क्षेत्र के लिए तैयारी
कृषि सचिव ने अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ साप्ताहिक 'क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप' की बैठकें हो रही हैं, जिनमें बारिश, जलाशयों के जलस्तर, बुआई की स्थिति और कीटों की निगरानी की जा रही है। देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को भी अपडेट किया गया है। साथ ही, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 'भारतीय कृषि में एल नीनो जोखिम प्रबंधन' पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। बैठक में यह भी बताया गया कि जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों और नई तकनीकों की वजह से पिछले कुछ वर्षों में कम बारिश के बावजूद खाद्यान्न उत्पादन स्थिर रहा है।
अन्य विभागों को अहम निर्देश
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभागों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा संवेदनशील राज्यों में तेजी से बढ़ाने के लिए कहा गया है। पशुपालन विभाग को राज्य और जिला स्तर पर सूखे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करने का निर्देश दिया गया। वहीं, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को संवेदनशील जिलों में सूक्ष्म योजना और निगरानी मजबूत करने को कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि हीटवेव, अधिक आर्द्रता और डेंगू के संभावित प्रकोप को लेकर एडवाइजरी पहले ही जारी की जा चुकी है।
इनपुट: IANS



