मणिपुर: पोंजी स्कीम से अलगाववाद की फंडिंग, 'सलाई ग्रुप' की ₹14.69 करोड़ की संपत्ति ED ने ज़ब्त की
मणिपुर में एक बड़े पोंजी स्कीम मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसते हुए 'सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज' और उससे जुड़े लोगों की 14.69 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त कर ली है। समाचार एजेंसी IANS की…
मणिपुर में एक बड़े पोंजी स्कीम मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसते हुए 'सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज' और उससे जुड़े लोगों की 14.69 करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त कर ली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समूह पर ऊँचे रिटर्न का लालच देकर आम लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने और उस पैसे का इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों के लिए करने का आरोप है। यह कार्रवाई 2 सितंबर को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत की गई।
ईडी की जांच में पता चला है कि समूह ने कुल 76.63 करोड़ रुपये की रकम अवैध रूप से जुटाई थी। ज़ब्त की गई नवीनतम संपत्तियों में ज़मीन, इमारतें, प्लांट-मशीनरी और कई औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयाँ शामिल हैं। इस मामले में अब तक कुल 67.92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे मामले की शुरुआत मणिपुर पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR से हुई थी। यह FIR यामबेम बिरेन और नरेनगबम समरजीत के खिलाफ दर्ज की गई थी, जो खुद को स्व-घोषित 'मणिपुर स्टेट काउंसिल' का क्रमशः 'मुख्यमंत्री' और 'विदेश व रक्षा मंत्री' बताते थे। इन पर भारत से मणिपुर की आज़ादी की घोषणा कर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और राजद्रोह जैसे गंभीर आरोप लगे। बाद में इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी चार्जशीट दाखिल की थी।
आरोपियों ने 'स्मार्ट सोसाइटी' और 'सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज' के ज़रिए बिना किसी कानूनी अधिकार के लोगों से पैसे जमा करवाए। लोगों को सालाना 36% रिटर्न का झांसा दिया गया। जांच में सामने आया कि इस फंड को समूह की 19 कंपनियों के माध्यम से लॉन्डर किया गया और अलगाववादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।
नियामक संस्थाओं को दिया धोखा
जांच के अनुसार, समूह की एक कंपनी 'सलाई फाइनेंशियल सर्विसेज' (SAFFINS) बॉम्बे मनी लेंडर्स एक्ट, 1946 के तहत सिर्फ पैसे उधार देने के लिए पंजीकृत थी। लेकिन आरोपियों ने इस रजिस्ट्रेशन का दुरुपयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मंज़ूरी के बिना ही एक बैंकिंग या NBFC संस्था की तरह लोगों से डिपॉजिट लेना शुरू कर दिया। इस धोखाधड़ी को सीबीआई ने भी एक अवैध पोंजी और मनी-सर्कुलेशन रैकेट बताते हुए FIR दर्ज की थी। ईडी के अनुसार, जुटाई गई रकम का इस्तेमाल व्यापारिक खर्च, संपत्ति खरीद, विदेश में पैसे भेजने और निदेशकों की निजी यात्राओं जैसे कामों के लिए किया गया। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



