मुंबई: 'डिजिटल अरेस्ट' कर कारोबारी से 14 दिन में ठगे ₹7.9 करोड़, खुद पुलिस ने घर जाकर दी जानकारी
मुंबई के एक 73 वर्षीय टूर एंड ट्रैवल कारोबारी 'डिजिटल अरेस्ट' नामक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए, जिसमें उन्होंने 14 दिनों के भीतर 7.9 करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम गंवा दी। समाचार एजेंसी IANS की…
मुंबई के एक 73 वर्षीय टूर एंड ट्रैवल कारोबारी 'डिजिटल अरेस्ट' नामक साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए, जिसमें उन्होंने 14 दिनों के भीतर 7.9 करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम गंवा दी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर पीड़ित को एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी और जांच के नाम पर यह ठगी की।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 18 जुलाई को मुंबई की वेस्ट साइबर पुलिस के अधिकारी खुद कारोबारी के अंधेरी स्थित घर पहुंचे और उन्हें बताया कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 21 जुलाई को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
कैसे रची गई धोखाधड़ी की साज़िश
साइबर ठगी का यह सिलसिला 5 जुलाई को एक व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ। कॉल करने वाले ने अपनी प्रोफाइल पर दिल्ली पुलिस की तस्वीर लगा रखी थी और खुद को एक अधिकारी बताते हुए कारोबारी को डराया। उसने दावा किया कि जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनका नाम सामने आया है।
ठगों ने मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताकर कारोबारी को किसी से भी बात करने से मना कर दिया। इसके बाद कई दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए उनसे पूछताछ का नाटक चलता रहा। राहुल गुप्ता नामक एक व्यक्ति ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक सरकारी बैंक में खाता खोला गया है, जिसमें 7 करोड़ रुपए जमा हैं, और उन्हें जल्द गिरफ्तारी की धमकी दी।
फर्जी दस्तावेज़ और लगातार दबाव
पीड़ित को अपने जाल में पूरी तरह फंसाने के लिए ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी दस्तावेज़ भी भेजे। खुद को दिल्ली साइबर पुलिस की अधिकारी बताने वाली निशा गुप्ता नाम की एक महिला ने पीड़ित से कहा कि उन्हें जांच के लिए अपने सारे म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक खातों की रकम बताए गए निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करनी होगी। इस बात को पुख्ता करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का एक जाली आदेश भी दिखाया गया।
लगातार डर और दबाव के चलते कारोबारी ने 7 जुलाई से 16 जुलाई के बीच छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 7.9 करोड़ रुपए ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। मुंबई पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और ठगी गई रकम को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इनपुट: IANS



