Delhi Storm and Rain: दिल्ली में आंधी-तूफान से इतने पेड़ टूटे कि गिनना हुआ मुश्किल, इन 3 कारणों से हुआ आंधी में पेड़ों को ज्यादा नुकसान

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Delhi Storm and Rain: दिल्ली में आंधी-तूफान से इतने पेड़ टूटे कि गिनना हुआ मुश्किल, इन 3 कारणों से हुआ आंधी में पेड़ों को ज्यादा नुकसान

Delhi Storm and Rain: दिल्ली में आंधी-तूफान से इतने पेड़ टूटे कि गिनना हुआ मुश्किल, इन 3 कारणों से हुआ आंधी में पेड़ों को ज्यादा नुकसान

सोमवार शाम आए भयंकर आंधी-तूफान की वजह से राजधानी में इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों को नुकसान पहुंचा है कि उसका सही सही आंकलन करने में अभी कुछ दिन और लगेंगे। तमाम एजेंसियों के पास इस संबंध में अलग-अलग आंकड़े हैं। एनडीएमसी के कंट्रोल रूम को सोमवार रात 9 बजे तक पेड़ और टहनियों के गिरने की करीब 170 कॉल्स मिली थीं, वहीं ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल रूम में मंगलवार सुबह तक बिल्डिंग का छज्जा या दीवार गिरने की 14 और पेड़ों के टूटने या खंभे गिरने की वजह से ट्रैफिक कंजेशन की 352 कॉल्स आ चुकी थीं। जिन जगहों पर पूरे का पूरा पेड़ या पेड़ का एक बड़ा हिस्सा गिरने की वजह से सड़कें बंद हो गई थीं, ऐसी जगहों की एक लिस्ट एनडीएमसी के हार्टिकल्चर विभाग ने भी तैयार की थी, जिसके मुताबिक, नई दिल्ली में 77 पेड़ गिरे थे और 58 जगहों पर बड़ी टहनियां या पेड़ का कोई बड़ा हिस्सा टूटकर सड़कों पर गिरा था। एमसीडी के आंकड़े के मुताबिक, करीब 155 जगहों पर पेड़ या टहनियां गिरी हैं। यही वजह है कि इस तूफान की वजह से दिल्ली की ग्रीनरी को हुए वास्तविक नुकसान का सही आंकलन करने में वक्त लग रहा है।

पेड़ों के नुकसान का हिसाब लगाने में जुटीं एजेंसियां

मंगलवार को तमाम सिविक एजेंसियों के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में हुए नुकसान का मुआयना और आंकलन करने में जुटे रहे। सबसे ज्यादा तबाही लुटियंस दिल्ली में नजर आई, जहां सैकड़ों पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचा। एनडीएमसी के एक सीनियर अधिकारी का कहना था कि पिछले तीन दशकों में ऐसा मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था, जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ टूटकर सड़कों पर गिरे हों। हालात इस कदर बिगड़ गए थे कि सड़कों पर गिरे पेड़ों और टहनियों को काटकर हटाने में एनडीएमसी के संसाधन कम पड़ गए। ऐसे में एमसीडी, सीपीडब्लूडी, दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग, दिल्ली फायर सर्विस और यहां तक कि NDRF की भी मदद लेनी पड़ी। एलजी के निर्देश पर इन सभी विभागों ने सोमवार की रात से ही अपनी टीमें अलग-अलग इलाकों में में भेजनी शुरू कर दी थीं, ताकि रात भर में सड़कों को इतना क्लियर कर दिया कि मंगलवार की सुबह उन पर से ट्रैफिक गुजर सके।

​दोपहर तक ट्रैफिक पर दिखा असर

तमाम कोशिशों के बावजूद मंगलवार को दोपहर तक नई दिल्ली के कई इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित रहा। कई जगह पेड़ों की टूटी टहनियां और मलबा सड़कों के किनारे ही पड़ा हुआ था, जिसके चलते सुबह पीक ऑवर्स में कई इलाकों में ट्रैफिक कंजेशन रहा। कस्तूरबा गांधी मार्ग पर तो इतने बड़े-बड़े पेड़ टूटकर गिरे थे कि इंडिया गेट से फिरोजशाह रोड के बीच आधा कस्तूरबा गांधी मार्ग दोपहर तक बंद रहा। यहां बड़ी बड़ी जेसीबी मशीनें, क्रेन और कटर्स मंगाकर पेड़ों को छोटे-छोटे हिस्सों में काटकर हटाना पड़ रहा था। अशोक रोड, शंकर रोड, कोपरनिकस मार्ग, अकबर रोड, जनपथ, मंडी हाउस, इंडिया गेट, मदर टेरेसा क्रिसेंट, फिरोजशाह रोड, जंतर मंतर रोड, तिलक मार्ग, पुराना किला रोड, पंडारा रोड, सुब्रह्मण्यम भारती मार्ग, मानसिंह रोड, सरदार पटेल मार्ग, के. कामराज मार्ग, कृष्णा मेनन मार्ग और टॉलस्टॉय रोड जैसी लुटियंस दिल्ली की कई अन्य प्रमुख सड़कों पर भी दोपहर तक ट्रैफिक कंजेशन बना रहा।

​नई दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में 7 और उत्तरी हिस्से में 70 से ज्यादा पेड़ टूटे

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आंधी ने वैसे तो सबसे ज्यादा नुकसान नई दिल्ली में पहुंचाया, लेकिन मंगलवार को जब एनडीएमसी के अधिकारियों ने यहां हुए नुकसान का आकलन किया, तो वे भी हैरान रह गए। नई दिल्ली की भौगोलिक स्थिति को दो हिस्सों में बांटकर देखा जाता रहा है। राजपथ का दक्षिणी हिस्सा, जिसमें साउथ एवेन्यू, तीन मूर्ति, चाणक्यपुरी, रेसकोर्स रोड, पृथ्वीराज रोड, तुगलक रोड, सफदरजंग रोड, अकबर रोड जैसे तमाम इलाके आते हैं। वहीं, राजपथ के उत्तरी हिस्से में नॉर्थ एवेन्यू, मंडी हाउस, कनॉट प्लेस, फिरोजशाह रोड, अशोक रोड, कस्तूरबा गांधी मार्ग, कोपरनिकस मार्ग, गोल मार्केट, शंकर रोड, मंदिर मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग जैसे इलाके आते हैं। एनडीएमसी के अधिकारियों का दावा है कि राजपथ के दक्षिणी हिस्से में पेड़ कम टूटे और टहनियां ज्यादा गिरीं। वहीं, उत्तरी हिस्से में पेड़ ज्यादा गिरे। इसी वजह से यहां तूफान का असर भी ज्यादा देखा गया।

लुटियंस दिल्ली में VIP बंगलों में भी गिरे पेड़

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, तूफान के बाद किए गए नुकसान के आकलन में पता चला कि राजपथ के दक्षिणी हिस्से में केवल 7 पेड़ टूटे थे और 58 पेड़ों की टहनियां गिरी थीं। वहीं, उत्तरी हिस्से में 70 पेड़ गिरे थे और केवल 7 जगहों पर बड़ी टहनियां गिरी थीं। हालांकि, यह आंकड़ा केवल उन जगहों का है, जहां पेड़ों या टहनियों के गिरने से रास्ते ब्लॉक हो गए थे। इसके अलावा लुटियंस दिल्ली में रहने वाले मंत्रियों, नेताओं और अफसरों के बंगलों में भी कई पेड़ और टहनियां टूटी हैं, जिनका आकलन किया जा रहा था।

​इन 3 कारणों से हुआ पेड़ों को ज्यादा नुकसान

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हरी भरी नई दिल्ली में इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों को हुए नुकसान को आने वाले खतरे का संकेत माना जा रहा है। पेड़ों के रखरखाव को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों के मुताबिक, नई दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के गिरने के तीन प्रमुख कारण हैं। एक तो यहां जो पेड़ लगे हुए हैं, उनमें से ज्यादातर पेड़ बहुत पुराने हैं। कइयों की उम्र तो 100 साल से भी अधिक है। ऐसे में कमजोर हो चुके ये पेड़ इतनी तेज आंधी तूफान को झेल नहीं पाए और टूटकर गिर गए। दूसरा और सबसे बड़ा कारण अंधाधुंध और बेतरतीब रोड कटिंग है, जिस कारण पेड़ों की जड़ों को काफी नुकसान पहुंचता है। कहीं अंडरग्राउंड केबल और गैस पाइपलाइन डालने के लिए, तो कहीं पर पानी या सीवर की लाइनें बिछाने के लिए सड़कों के किनारे बार-बार खुदाई की जाती है, जिसका सबसे ज्यादा असर आस-पास के पेड़ों पर पड़ता है और उनकी मजबूती कमजोर पड़ती जाती है।

अंधाधुंध कंक्रीटाइजेशन से पेड़ों पर पड़ा दबाव

वहीं, तीसरा बड़ा कारण लगातार होता कंक्रीटाइजेशन है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण मंडी हाउस में श्रीराम सेंटर के पास जड़ से उखड़ा पीपल का पेड़ था, जिसमें जमीन के अंदर पेड़ की जड़ों के आस-पास तक ईंट और पत्थर लगे नजर आ रहे थे। चूंकि नई दिल्ली के उत्तरी हिस्से में बड़े मार्केट, ऑफिस कॉम्प्लेक्स और अपेक्षाकृत घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके हैं, ऐसे में यहां सड़कों और फुटपाथों पर, इमारतों के आस-पास नियमों को ताक पर रखकर किए गए अंधाधुंध कंक्रीटाइजेशन के कारण भी पेड़ों की मजबूती पर असर पड़ रहा है। खासकर पेड़ों के आस-पास जितनी जगह खाली छोड़ी जानी चाहिए, उतनी जगह नहीं छोड़ने से मिट्टी में हर वक्त नमी बनी रहती है, जिससे पेड़ ज्यादा दबाव सहन नहीं कर पाते हैं।

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