Delhi Pollution News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, CCTV और ड्रोन से होगा प्रदूषण पर ‘वार’, देखें इन 7 तरीकों से दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर होगी नजर

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Delhi Pollution News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, CCTV और ड्रोन से होगा प्रदूषण पर ‘वार’, देखें इन 7 तरीकों से दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर होगी नजर

Delhi Pollution News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, CCTV और ड्रोन से होगा प्रदूषण पर ‘वार’, देखें इन 7 तरीकों से दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर होगी नजर

विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर नजर रखने और उसे कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ड्रोन जैसी तकनीकों की मदद ली जाएगी। सीएक्यूएम (कमिशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट) ने आधुनिक तकनीकों से जुड़े 7 ऐसे प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इसमें दो प्रोजेक्ट नीरी के साथ मिलकर किए जाएंगे। सीएक्यूम ने विभिन्न संस्थानों, प्रदूषण पर काम करने वाले लोगों आदि से इस तरह के प्रोजेक्ट मांगे थे। आवेदकों में 7 प्रोजक्ट को मंजूरी दी गई है।

​1. CCTV फुटेज से होगी गाड़ियों की गिनती

नीरी नागपुर के प्रोजेक्ट में सीसीटीवी फुटेज को क्लाउड प्लैटफॉर्म पर अपलोड कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट से गाड़ियों की गिनती की जाएगी। इसकी मदद से गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण के हॉट स्पॉट के बारे में जानकारी मिल सकेगी। गाड़ियों की गिनती के लिए अलग-अलग ट्रैफिक डेनसिटी का इस्तेमाल किया जाएगा। अलग-अलग सड़कों की 24 घंटे की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह काम होगा।

​2. पता करेंगे कि गाड़ियों की वजह से कितनी उड़ती है धूल

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धूल का प्रदूषण कम करने के लिए निरी के साथ मिलकर साइंस एंड टेक्नालॉजी के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि गाड़ियों की वजह से सड़क पर कितनी धूल उड़ती है। इस स्टडी का मकसद धूल के प्रदूषण को कम करना है। इसके बाद सड़कों पर धूल कम करने के प्रयास तेज किए जाएंगे।

​3. ड्रोन से एनसीआर के हॉट स्पॉट पर रखेंगे नजर

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पटियाला के थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी के साथ मिलकर एनसीआर के हॉट स्पॉट पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। ड्रोन से तय एरिया में रियल टाइम एयर क्वॉलिटी की निगरानी की जाएगी। इसमें सल्फर डायआक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषक शामिल हैं। इस तरह की निगरानी से जमीन पर, हवा में, सीजन के हिसाब से होने वाले प्रदूषण को लेकर रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

​4. डिसिजन सपोर्ट सिस्टम से प्रदूषण की निगरानी

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आइआईटीएम पुणे के साथ मिलकर डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के जरिए एक स्टडी की जाएगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि दिल्ली में स्थानीय, क्षेत्रीय और दूर से आने वाले प्रदूषण के सोर्स क्या हैं। इसमें खास तौर पर फरीदाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम, गौतमबुद्ध नगर, झज्जर, सोनीपत, बागपत और रोहतक का रोज आकलन किया जाएगा।

​5. बाजारों में एंबियंट एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम का ट्रायल

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तंजावुर की सस्त्र यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम का ट्रायल किया जाएगा। इस सिस्टम को लेकर दावा है कि यह लोगों को खतरनाक प्रदूषकों से बचाता है और एक्यूआई में 25 से 50 प्रतिशत की कमी करता है। इस तकनीक में फिल्टर की बजाय एरोडायनामिक तकनीक का इस्तेमाल होता है।

​6. बसों में फिल्टरलेस एयर क्लीनर रेट्रोफिट

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आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर की बसों की रेट्रोफिटिंग कर उनमें फिल्टरलेस एयर क्लीनर का ट्रायल किया जाएगा। यह भी एरोडायनामिक तकनीक से हवा को साफ करती है। इसकी ऑपरेशन कॉस्ट भी काफी कम है और इसमें स्टेंडअलोन सोलर पावर का ऑप्शन भी है।

​7. टू-वीलर, ऑटो और ऑटो रिक्शा की रेट्रोफिटिंग

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एआरएआई (ऑटोमोटिव रिसर्च असोसिएशन ऑफ इंडिया) पुणे के साथ मिलकर टू वीलर, ऑटो और ऑटो रिक्शा की रेट्रोफिटिंग के प्रपोजल को भी मंजूरी दी गई है। टू-वीलर और थ्री वीलर की रेट्रोफिटिंग कर उन्हें मेकेनिकल और इलेक्ट्रिक इंटीग्रेशन के जरिए रेट्रोफिट किट से जोड़ दिया गया। इस तरह की गाड़ियों के इस्तेमाल और उनके रन टाइम का पूरा डाटा एकत्रित कर उसकी स्टडी की जाएगी। इससे गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण के अलावा गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर भी कई जानकारियां सामने आ सकेंगी।

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