दिल्ली लाठीचार्ज: सुप्रिया सुले ने पैलेट गन के ऑर्डर पर सरकार से मांगा जवाब, SIT जांच की मांग दोहराई
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर कई मोर्चों पर निशाना साधा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुले ने दिल्ली…
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर कई मोर्चों पर निशाना साधा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुले ने दिल्ली में 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज की घटना की न्यायिक जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग दोहराई और पूछा कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और 'इंडिया' गठबंधन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी बनाई जाए। सुले ने कहा, "देश को यह जानने का अधिकार है कि पैलेट गन्स का ऑर्डर किसने दिया था और सरकार को इस सवाल का जवाब देना होगा।" उनके अनुसार, अगर सरकार ने यह मांग पहले मान ली होती तो सदन में इस पर सार्थक चर्चा हो सकती थी।
पीएम केयर्स फंड और अन्य मुद्दों पर सवाल
सुप्रिया सुले ने पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी फंड की स्थापना के समय से ही यह मांग कर रही है कि इसमें पैसा कहां से आया, यह देश को बताया जाए। उन्होंने पूछा कि इसमें छिपाने जैसा क्या है और सरकार को सारी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने एक मंदिर में हुई चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि जब चैनलों ने वीडियो दिखाए थे, तो संबंधित लोगों को क्लीन चिट कैसे मिली, यह एक बड़ा सवाल है।
युवा पीढ़ी, केंद्रीय एजेंसियां और मराठी भाषा
भाजपा नेताओं द्वारा युवा पीढ़ी (जेनजी) पर की गई टिप्पणियों पर सुले ने आश्चर्य जताया। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने जेनजी को 'ईमानदार पीढ़ी' कहा था। सुले ने कहा कि एक तरफ जेनजी को ईमानदार बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा उन्हें भ्रष्ट साबित करने की कोशिश कर रही है।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स, सीबीआई और ईडी का जैसा इस्तेमाल भाजपा ने किया है, वैसा पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया। महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर फ्लाइंग स्क्वाड की कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि लोगों को डराने-धमकाने की बजाय प्यार और विश्वास से भाषा सिखानी चाहिए। इसके लिए अच्छे ऐप और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सकती है।
पुणे पुलिस और एनसीपी का आंतरिक संघर्ष
राहुल गांधी से जुड़े एक मामले में पुणे पुलिस की सक्रियता पर भी सुप्रिया सुले ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब पुणे में महिलाओं से छेड़छाड़, कोयता गैंग की हिंसा, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं होती हैं, तब पुलिस इतनी सक्रिय नहीं दिखती। वहीं, अजित पवार और शरद पवार गुट के बीच चल रहे विवाद पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी पार्टी की संवैधानिक लड़ाई है, न कि कोई आंतरिक मामला। उन्होंने कहा, "पार्टी के संस्थापक सदस्य और संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार हैं और पार्टी उन्हें ही मिलनी चाहिए।" सुले ने इसे देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई बताया।
इनपुट: IANS



