Delhi Gangster: लोकल गुंडों को गैंग में भर्ती कर रहा है लॉरेंस बिश्नोई, कई बदमाश पिछले दिनों पकड़े गए h3>
नई दिल्लीः तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा से गैंग ऑपरेट कर रहा गोल्डी बरार देशभर के छोटे-बड़े बदमाशों का बड़े शातिराना तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने लॉरेंस सिंडिकेट के लिए काम कर रहे कई बदमाश पिछले दिनों पकड़े हैं। पूछताछ में इन्होंने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। इन गुर्गों का कहना है कि उन्हें हत्या या फायरिंग करने पैसे दिए जाते हैं। लेकिन जितना वादा किया जाता है, उतना पैसा नहीं दिया जाता है। इसी तरह बदमाशों की पैसे की जरूरत भी पूरी की जाती है। लेकिन बदले में उनका जमकर इस्तेमाल किया जाता है। अत्याधुनिक हथियार भी मुहैया करवाए जाते हैं।
दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने मदनगीर के दो लाख इनामी गैंगस्टर शाहरूख को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान इसने बताया कि पिछले साल जब दिल्ली पुलिस की कई टीमें उसके पीछे पड़ी थीं तो उसने तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा से पैसे के लिए संपर्क किया, जिसने लॉरेंस से बात कराई। इसके जरिए कनाडा में बैठे गोल्डी बरार से बात हुई। गोल्डी ने शाहरूख को फरीदाबाद से 50 हजार रुपये दिलवाए थे। हरियाणा और पंजाब में फरारी में मदद की थी। मेरठ में शक्ति नायडू के एनकाउंटर के बाद शाहरूख ने हाशिम बाबा का थामन थाम लिया था। इसके कहने पर ही मंडावली और जाफराबाद में मर्डर किए थे।
पुलिस अफसरों के मुताबिक, कई गुंडों ने खुलासा किया कि लॉरेंस का नेटवर्क महाराष्ट्र और गुजरात तक भी फैला है। गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू का बड़ा भाई ज्योति बाबा को गुजरात में फरारी कटवाने में भी इसका हाथ था। शराब माफिया धेन भाई करिया की मदद ली गई थी, जिसने बाबा को शरण दी थी। नंदू विदेश भाग चुका है। ये दोनों भाई लॉरेंस सिंडिकेट का हिस्सा हैं। लॉरेंस गैंगस्टरों की हेल्प करता है। बदले में अपने बड़े-बड़े काम करा लेता है। छुटभैये बदमाश लॉरेंस गैंग से जुड़ने को उतावले रहते हैं। इसका फायदा उठाते हुए इन इन बदमाशों को हथियार और जरूरत की चीजें देकर अपना काम कर लेता है।
पुलिस अफसरों का दावा है कि कुछ बदमाशों ने बताया कि वारदात करने के लिए बड़ी रकम ऑफर की जाती है।काम हो जाने के बाद पूरा पैसा नहीं मिलता है। गैंग का काम करने का ऐसा तरीका है, जिसे बड़े-बड़े बिजनेसमैन अपनाते हैं। एक काम का पूरा पैसा नहीं देने से बदमाश गैंग छोड़ता नहीं है। इसी तरह गैंग के बदमाश नए लड़कों को मौज-मस्ती के बहाने ले जाते हैं। वहां वारदात को अंजाम दे देते हैं। इससे नए लड़के फंस जाते हैं, जिन्हें मुकदमे और पुलिस का डर दिखाया जाता है। इससे ना चाहते हुए लड़के इनके गैंग का हिस्सा बन जाते हैं। इसके बाद चाहते हुए भी जुर्म की दलदल से बाहर नहीं निकल पाते हैं।

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दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने मदनगीर के दो लाख इनामी गैंगस्टर शाहरूख को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान इसने बताया कि पिछले साल जब दिल्ली पुलिस की कई टीमें उसके पीछे पड़ी थीं तो उसने तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा से पैसे के लिए संपर्क किया, जिसने लॉरेंस से बात कराई। इसके जरिए कनाडा में बैठे गोल्डी बरार से बात हुई। गोल्डी ने शाहरूख को फरीदाबाद से 50 हजार रुपये दिलवाए थे। हरियाणा और पंजाब में फरारी में मदद की थी। मेरठ में शक्ति नायडू के एनकाउंटर के बाद शाहरूख ने हाशिम बाबा का थामन थाम लिया था। इसके कहने पर ही मंडावली और जाफराबाद में मर्डर किए थे।
पुलिस अफसरों के मुताबिक, कई गुंडों ने खुलासा किया कि लॉरेंस का नेटवर्क महाराष्ट्र और गुजरात तक भी फैला है। गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू का बड़ा भाई ज्योति बाबा को गुजरात में फरारी कटवाने में भी इसका हाथ था। शराब माफिया धेन भाई करिया की मदद ली गई थी, जिसने बाबा को शरण दी थी। नंदू विदेश भाग चुका है। ये दोनों भाई लॉरेंस सिंडिकेट का हिस्सा हैं। लॉरेंस गैंगस्टरों की हेल्प करता है। बदले में अपने बड़े-बड़े काम करा लेता है। छुटभैये बदमाश लॉरेंस गैंग से जुड़ने को उतावले रहते हैं। इसका फायदा उठाते हुए इन इन बदमाशों को हथियार और जरूरत की चीजें देकर अपना काम कर लेता है।
पुलिस अफसरों का दावा है कि कुछ बदमाशों ने बताया कि वारदात करने के लिए बड़ी रकम ऑफर की जाती है।काम हो जाने के बाद पूरा पैसा नहीं मिलता है। गैंग का काम करने का ऐसा तरीका है, जिसे बड़े-बड़े बिजनेसमैन अपनाते हैं। एक काम का पूरा पैसा नहीं देने से बदमाश गैंग छोड़ता नहीं है। इसी तरह गैंग के बदमाश नए लड़कों को मौज-मस्ती के बहाने ले जाते हैं। वहां वारदात को अंजाम दे देते हैं। इससे नए लड़के फंस जाते हैं, जिन्हें मुकदमे और पुलिस का डर दिखाया जाता है। इससे ना चाहते हुए लड़के इनके गैंग का हिस्सा बन जाते हैं। इसके बाद चाहते हुए भी जुर्म की दलदल से बाहर नहीं निकल पाते हैं।

