गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पालघर: विक्रमगढ़ में 25 हजार स्कूली बच्चों के लिए बनेगी अत्याधुनिक रसोई, फडणवीस सरकार का प्रस्ताव

महाराष्ट्र के पालघर जिले के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार विक्रमगढ़…

पालघर: विक्रमगढ़ में 25 हजार स्कूली बच्चों के लिए बनेगी अत्याधुनिक रसोई, फडणवीस सरकार का प्रस्ताव
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र के पालघर जिले के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार विक्रमगढ़ तालुका में एक अत्याधुनिक केंद्रीय रसोईघर स्थापित करने पर विचार कर रही है, जिसकी क्षमता रोजाना 25,000 स्कूली बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की होगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना के लिए लगभग डेढ़ एकड़ जमीन मुहैया कराने का प्रस्ताव है।

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इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन देकर उनकी भूख की समस्या को कम करना है। उम्मीद है कि इससे न केवल स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ेगी, बल्कि पढ़ाई में निरंतरता के साथ-साथ सीखने की क्षमता में भी सुधार होगा। फिलहाल, इस केंद्रीय रसोईघर के निर्माण और संचालन के लिए आवश्यक सरकारी अनुमतियां लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार

प्रस्तावित रसोईघर अपनी पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद 25,000 विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराएगा। हालांकि, शुरुआती चरण में लगभग 2,000 से 3,000 छात्रों को ही भोजन दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी मंजूरियों और संचालन की तैयारियों के आधार पर इसका विस्तार किया जाएगा।

शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, अकेले विक्रमगढ़ तालुका के 273 स्कूलों में कुल 29,124 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें जिला परिषद के स्कूलों में 15,091, आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों में 2,636 और अनुदानित आदिवासी स्कूलों में 3,607 छात्र शामिल हैं। सरकार की योजना है कि इस मध्याह्न भोजन कार्यक्रम का लाभ जिला परिषद स्कूलों, निजी अनुदानित स्कूलों और अन्य पात्र स्कूलों तक धीरे-धीरे पहुंचाया जाएगा।

पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर

योजना में पारदर्शिता और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। इसके तहत नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी और स्वतंत्र संस्थाओं से ऑडिट भी कराया जाएगा। साथ ही, योजना के परिणामों का समय-समय पर मूल्यांकन भी किया जाएगा। पालघर के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह प्रस्ताव बेहद अहम माना जा रहा है, और सरकारी मंजूरी मिलने के बाद इसका सीधा लाभ हजारों बच्चों को मिलेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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