Civil Lines Murder: स्कूल ड्रॉपआउट ने यूट्यूब और गूगल पर वीडियो देख-देखकर बनाया हत्या का फूलप्रूफ प्लान, लेकिन…

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Civil Lines Murder: स्कूल ड्रॉपआउट ने यूट्यूब और गूगल पर वीडियो देख-देखकर बनाया हत्या का फूलप्रूफ प्लान, लेकिन…

Civil Lines Murder: स्कूल ड्रॉपआउट ने यूट्यूब और गूगल पर वीडियो देख-देखकर बनाया हत्या का फूलप्रूफ प्लान, लेकिन…

कत्ल और लूट का मास्टरमाइंड नाबालिग को सिविल लाइंस निवासी 76 साल के कारोबारी ने दो साल पहले घर में चोरी करने पर जॉब से निकाल दिया था। पिता को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। दोनों को काफी जलील भी किया गया था। इससे नाबालिग काफी आहत था। वो बदला लेने और मोटी रकम हासिल करने की उधेड़बुन में लग गया। आरोपी ने गूगल और यू-ट्यूब पर सर्च किया। कई वीडियो और चोरी के तरीकों की स्टडी की। साजिश में अपने ही गांव के नाबालिग दोस्त को मिला लिया। वो मानता था कि प्लानिंग फूलप्रूफ है, लेकिन क्राइम ब्रांच ने भेद दिया। दोनों आरोपी स्कूल ड्रॉपआउट हैं।

कारोबारी ने पिता और पुत्र दोनों को नौकरी से निकाल दिया

पुलिस अफसरों ने बताया कि 17 साल के नाबालिग का परिवार वजीराबाद इलाके में रहता है। वो मूल रूप से बिहार के मधुबनी का है। कारोबारी राम किशोर गुप्ता के यहां नाबालिग के पिता ड्राइवर थे। उन्होंने ही तब नाबालिग को घरेलू नौकर रखवाया। नाबालिग को पहले मकान मालिक का बेटा और फिर भतीजा बताया था। तीन महीने बाद नाबालिग ने 20 हजार रुपये कैश और कुछ सामान चोरी कर लिया। इसका पता लगने पर कारोबारी ने ड्राइवर पिता को खूब खरी-खोटी सुनाई। पिता ने तब बताया कि जिसे वो भतीजा बता रहे थे, वो सगा बेटा है। कारोबारी ने पिता और पुत्र दोनों को नौकरी से निकाल दिया।

​हफ्ते भर में दे दिया अंजाम

जलील होकर नौकरी से दोनों को निकाले जाने का नाबालिग के दिमाग पर गहरा असर पड़ा। वह बुजुर्ग कारोबारी से बदला लेने की सोचने लगा। वो अमीर भी बनना चाहता था। इसलिए बचपन के साथी 16 साल के दूसरे नाबालिग को साजिश में शामिल कर लिया। वह गांव गया था, जिसे वारदात के एक हफ्ते पहले ही दिल्ली बुला लिया। गूगल और यू-ट्यूब पर चोरी करने के कई विडियो देखे। इसके बाद टॉय गन और चाकू खरीदे। तड़के वारदात को अंजाम देना था, इसलिए एक बाइक की जरूरत थी। यू-ट्यूब पर बगैर चाबी के बाइक को स्टार्ट करने के गुर सीखे, जिसके बाद 28 अप्रैल को वजीराबाद से इसका इस्तेमाल कर बाइक चोरी कर ली।

​एक दिन खड़ी कर दी बाइक

स्पेशल सीपी (क्राइम) रवींद्र यादव ने बताया कि आरोपी 30 अप्रैल को पूरे इलाके की रेकी कर गए थे। वो बाइक को खड़ी कर गए थे, क्योंकि सुबह तड़की गार्ड किसी भी बाइक के भीतर नहीं जाने देते हैं। लेकिन बाहर बाइक लाने में कोई मनाही नहीं है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता चला कि रेकी करने बाइक से दो लड़के आए तो थे। लेकिन वो बाइक कॉलोनी से बाहर निकलते नहीं देखी गई। इस की तफ्तीश करने पर ही नाबालिगों के मेट्रो कार्ड का इस्तेमाल करने की बात सामने आई। आरोपी 1 मई की सुबह सिविल लाइंस के भीतर घुसे तो गार्ड ने उनसे अंदर जाने की वजह पूछी थी तो वो मंदिर में जाने की बात कहकर अंदर जाने में सफल रहे।

​टैटू गुदवाए और कमरा लिया

नाबालिग सिविल लाइंस और कारोबारी के घर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों नाबालिग एक दिन पहले खड़ी की बाइक में बैठकर कैश और सामान लेकर फरार हो गए। आरोपियों ने करीब 25 हजार रुपये खर्च कर दिए। इससे मुकुंदपुर में 1700 रुपये एडवांस देकर एक कमरा किराया पर लिया था। यहीं पर चोरी का सामान रखा गया। 9वीं पास मास्टरमाइंड नाबालिग ने इससे करीब 15 हजार का एक फोन खरीदा और अपने हाथों पर टैटू बनवाए। दूसरा नाबालिग 10वीं पास है, उसे भी पैसे का लालच देकर साजिश में शामिल किया था। दोनों बचपन के दोस्त हैं। दोनों पर बालिग के तौर पर केस चले, पुलिस संभावना तलाश रही है।

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