छात्र प्रदर्शन में AK-47 से फायरिंग: बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- कांस्टेबल ने हवा में गोली चलाई
बिहार में छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित बर्बरता के आरोपों पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार ने अपने हलफनामे में पुलिस पर 'अनुचित बल' के इस्तेमाल…
बिहार में छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और कथित बर्बरता के आरोपों पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार ने अपने हलफनामे में पुलिस पर 'अनुचित बल' के इस्तेमाल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बिगड़ती कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पर मंगलवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई होनी है।
हलफनामे में सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग की घटना पर विशेष रूप से सफाई दी गई है। सरकार के अनुसार, जब एक कांस्टेबल भीड़ में घिर गया, तो उसने आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाईं। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि इन गोलियों से किसी भी प्रदर्शनकारी को कोई चोट नहीं आई।
पुलिस की कार्रवाई और उसके नतीजे
बिहार सरकार ने हलफनामे में स्वीकार किया है कि AK-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक 'प्लाटून स्तर का हथियार' है जिसे विशेष अभियानों के लिए रखा गया है। राज्य के डीजीपी ने इस संबंध में नए निर्देश भी जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए सरकार ने बताया कि हाथी चौक के पास एक एएसआई ने अपनी 9 एमएम पिस्टल से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दो राउंड फायर किए थे। इस गोलीबारी में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। सरकार ने जोर देकर कहा कि इन तीनों को AK-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस जगह पर मौजूद भी नहीं थे, जहाँ से AK-47 चली थी। मामले में बैलिस्टिक जांच चल रही है।
आंकड़ों में पूरा घटनाक्रम
राज्य सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच पूरे प्रदेश में कुल 69 एफआईआर दर्ज की गईं और लगभग 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्रों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। इसके अलावा, 75 नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से छोड़ा गया। सरकार ने यह भी कहा कि प्रदर्शनों के दौरान 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए। छपरा में हुई हिंसा में एक बीडीओ की आंख चली गई, जबकि दूसरे के सिर में गंभीर चोट आई।
साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी सूचित किया है कि अतिरिक्त डीजीपी को सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, प्रदर्शनकारियों से जुड़ी कोई भी निजी जानकारी या डिजिटल डेटा फिलहाल सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो। हलफनामे में हिंसा के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और आरवाईए जैसे संगठनों के प्रदर्शन के आह्वान को जिम्मेदार ठहराया गया है।
इनपुट: IANS



