गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पुलवामा के बादाम बागानों में बहार: बंपर फसल से किसानों के चेहरे खिले, पारंपरिक तरीकों से कटाई जारी

कश्मीर के पुलवामा की घाटियों में बादाम के बाग इस साल उम्मीदों से भरे हैं। कई वर्षों के कम उत्पादन के संकट के बाद, इस बार की बंपर फसल ने किसानों के चेहरों पर रौनक लौटा दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक…

पुलवामा के बादाम बागानों में बहार: बंपर फसल से किसानों के चेहरे खिले, पारंपरिक तरीकों से कटाई जारी
(फोटो: IANS)

कश्मीर के पुलवामा की घाटियों में बादाम के बाग इस साल उम्मीदों से भरे हैं। कई वर्षों के कम उत्पादन के संकट के बाद, इस बार की बंपर फसल ने किसानों के चेहरों पर रौनक लौटा दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बागानों में बादाम की कटाई का काम पूरे ज़ोर-शोर से चल रहा है और पैदावार में आए इस उछाल ने स्थानीय कृषि समुदाय में एक नई ऊर्जा भर दी है।

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जिले के मुख्य बागवानी अधिकारी, रियाज अहमद शाह ने बताया, "इस साल मौसम ने हमारा भरपूर साथ दिया है। किसानों की दिन-रात की मेहनत, सही समय पर दी गई विभागीय कृषि सलाह और उन्नत कीटनाशकों एवं उर्वरकों के सटीक इस्तेमाल से पैदावार में यह जबरदस्त उछाल आया है।"

भविष्य को सुरक्षित करने की पहल

लगातार गिरती पैदावार की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने एक दूरगामी योजना पर काम शुरू किया है। रियाज अहमद शाह के मुताबिक, जिला प्रशासन और निदेशालय ने मिलकर 100 कनाल जमीन पर एक विशेष बाग तैयार किया है। इसके अलावा, नर्सरी की 5 हेक्टेयर भूमि पर विदेशों से लाए गए उच्च गुणवत्ता वाले पौधे लगाए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में कश्मीर का बादाम उद्योग नई बुलंदियों पर पहुँचेगा।

परंपरा और तकनीक का संगम

आधुनिक दौर में भी, पुलवामा के किसान बादाम तोड़ने के लिए अपनी पारंपरिक जनजातीय विधियों का इस्तेमाल करते हैं। वे पेड़ों पर चढ़कर लंबी लचीली लकड़ियों से डालियों को धीरे-धीरे पीटते हैं, जिससे बादाम नीचे बिछे तिरपाल पर गिरते हैं और मिट्टी लगने से बच जाते हैं।

हालांकि, कटाई के बाद की प्रक्रिया में अब तकनीक ने भी जगह बना ली है। पहले जहां पूरा परिवार मिलकर बादाम से हरा छिलका हटाता था, वहीं अब कई बागान मालिक समय बचाने के लिए मशीनों का सहारा ले रहे हैं। इसके बाद, बादामों को धूप में सुखाया जाता है ताकि उनकी गिरी स्वादिष्ट और कुरकुरी हो जाए।

कश्मीर के खास बादाम

पुलवामा के बागानों में दो तरह के बादाम खास तौर पर मशहूर हैं। 'कागजी बादाम' अपने पतले छिलके के लिए जाना जाता है, जिसे हाथ से ही आसानी से तोड़ा जा सकता है। वहीं, 'कश्मीरी मामरा' अपने छोटे आकार, मुड़ी हुई बनावट और भरपूर प्राकृतिक तेल के कारण एक प्रीमियम किस्म मानी जाती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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