बिहार विधान परिषद: अवधेश नारायण सिंह ने सभापति पद छोड़ा, JDU को मिल सकती है कमान
बिहार विधान परिषद के सभापति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र उपसभापति प्रो. रामवचन राय को सौंपा, जिसके…
बिहार विधान परिषद के सभापति और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र उपसभापति प्रो. रामवचन राय को सौंपा, जिसके बाद यह पद रिक्त हो गया है। गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह ने कहा कि वह एक सदस्य के रूप में परिषद में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस इस्तीफे के बाद अब विधान परिषद के नए अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्ता पक्ष के गलियारों में ऐसी अटकलें हैं कि सभापति का पद अब जनता दल (यूनाइटेड) के कोटे में जा सकता है। इस दौड़ में वर्तमान उपसभापति प्रो. रामवचन राय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
इस्तीफे में जताया आभार
अपने त्यागपत्र में अवधेश नारायण सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक भाजपा कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की और संगठन में विभिन्न पदों पर काम किया। इस यात्रा में मिले सहयोग के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "एनडीए गठबंधन सरकार में उन्हें चार बार विधान परिषद का सभापति बनने का गौरव प्राप्त हुआ।" उन्होंने अपने कार्यकाल में सहयोग के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी धन्यवाद किया।
सिंह ने तीन दशक से अधिक समय तक विधान परिषद के सदस्य रहने को अपना सौभाग्य बताया और परिषद के सभी सदस्यों व सचिवालय के कर्मचारियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
राजनीतिक महत्व और आगे की प्रक्रिया
अवधेश नारायण सिंह का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव की घोषणा हो चुकी है, जिसके लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इस वजह से उनके पद छोड़ने को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नए सभापति के नाम पर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि विधान परिषद का नेतृत्व किसे सौंपा जाएगा।
इनपुट: IANS



