बिहार विधान परिषद: दो नए निर्दलीय सदस्यों की सदस्यता पर खतरा, राजद ने की रद्द करने की मांग
बिहार में हाल ही में विधान परिषद के लिए चुने गए दो निर्दलीय सदस्यों की सदस्यता दल-बदल विरोधी कानून के तहत खतरे में पड़ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आरोप लगाया है कि दोनों सदस्यों ने चुनाव जीतने…
बिहार में हाल ही में विधान परिषद के लिए चुने गए दो निर्दलीय सदस्यों की सदस्यता दल-बदल विरोधी कानून के तहत खतरे में पड़ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने आरोप लगाया है कि दोनों सदस्यों ने चुनाव जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है, जो कि असंवैधानिक है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी मुद्दे को लेकर राजद के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा।
राजद के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीते वंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित डॉ. राहुल राज को अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। राजद का तर्क है कि दोनों ही प्रत्याशी स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते थे और आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनकी यही स्थिति दर्ज है।
कानूनी और संवैधानिक आधार
राजद ने अपनी मांग के पक्ष में संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2(2) का हवाला दिया है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई निर्दलीय निर्वाचित सदस्य चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है। पार्टी ने कहा है कि सार्वजनिक रूप से यह जानकारी सामने आई है कि इन दोनों सदस्यों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 191(2) और 10वीं अनुसूची के पैरा 6(1) का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत किसी सदस्य की अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार सदन के सभापति को होता है। राजद ने सभापति से इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों के तहत निष्पक्ष और तत्काल कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया है।
साक्ष्य और अपील
राजद ने अपने दावे को पुख्ता करने के लिए दोनों सदस्यों के निर्वाचन संबंधी रिकॉर्ड, उनके भाजपा में शामिल होने के प्रमाण और संबंधित मीडिया रिपोर्टों को बतौर साक्ष्य प्रस्तुत किया है। ज्ञापन में बिहार विधान परिषद सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम, 1994 और सर्वोच्च न्यायालय के एक पुराने फैसले का भी जिक्र है।
राजद ने इस मामले को सिर्फ दो व्यक्तियों का राजनीतिक फैसला न बताकर इसे लोकतांत्रिक जनादेश और संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी ने मांग की है कि दोनों सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूरी की जाए और याचिकाकर्ताओं को अंतिम फैसले की लिखित सूचना दी जाए।
इनपुट: IANS



