बिहार MLC चुनाव: 8 सीटों पर थमा प्रचार, पटना स्नातक सीट पर JDU के नीरज और जन सुराज के अनुज में दिलचस्प लड़ाई
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए बुधवार को चुनाव प्रचार थम गया। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए सभी दलों ने आखिरी दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस चुनाव में…
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए बुधवार को चुनाव प्रचार थम गया। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए सभी दलों ने आखिरी दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA), महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।
इन आठ सीटों में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, जिनके लिए कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन प्रत्याशियों ने जनसंपर्क के अलावा फोन कॉल और वॉयस मैसेज के जरिए भी मतदाताओं से संपर्क साधा।
सबसे चर्चित सीट: पटना स्नातक क्षेत्र
इस चुनाव में सबसे ज्यादा नजरें पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर टिकी हैं। यहां JDU के मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार अपनी सीट बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें जन सुराज के अनुज सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है। RJD ने भी यहां से दिलीप कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है।
इस सीट का मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि JDU विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ, अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करते दिखे। इसी बीच, नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने और उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर ने भी राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं।
किसके कितने उम्मीदवार
NDA में सीटों के बंटवारे के तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने चार-चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं, महागठबंधन के दलों के बीच कुछ सीटों पर तालमेल की कमी दिख रही है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सभी आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को और कड़ा बना दिया है।
चुनाव की व्यवस्था और आगे क्या
इन सीटों पर मतदान के लिए कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी शामिल हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण सीटों पर वोट डाले जाएंगे। प्रचार थमने के बाद अब सभी उम्मीदवारों का जोर मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने पर है, ताकि 23 अक्टूबर को ज्यादा से ज्यादा वोट उनके पक्ष में पड़ें।
इनपुट: IANS



