रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बिहार: दो निर्दलीय MLC के BJP में जाने पर RJD का कड़ा ऐतराज, सदस्यता रद्द करने की मांग

बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय तौर पर जीत हासिल करने वाले दो सदस्यों के भाजपा में शामिल होने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे असंवैधानिक बताते हुए दोनों की…

बिहार: दो निर्दलीय MLC के BJP में जाने पर RJD का कड़ा ऐतराज, सदस्यता रद्द करने की मांग
(फोटो: IANS)

बिहार विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय तौर पर जीत हासिल करने वाले दो सदस्यों के भाजपा में शामिल होने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे असंवैधानिक बताते हुए दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा है कि पार्टी इस मामले को विधान परिषद के सभापति के सामने उठाएगी और जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी।

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यह पूरा विवाद सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीते राहुल राज और तिरहुत स्नातक क्षेत्र से जीते बंशीधर ब्रजवासी को लेकर है। दोनों ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और NDA समर्थित JDU प्रत्याशियों को हराया था। शनिवार को ये दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षद भाजपा कार्यालय में हुई विधानमंडल दल की बैठक में शामिल हुए, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया।

संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन?

रविवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजद के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता मनोज कुमार झा ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद किसी निर्दलीय सदस्य का राजनीतिक दल में शामिल होना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार बनता है। उन्होंने संविधान के पैरा 2(2) और अनुच्छेद 191(2) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे सदस्य को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

झा ने दावा किया, "दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से संबंधित पर्ची प्रदर्शित की थी।" उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के वीडियो और अन्य सबूत मौजूद हैं। राजद नेता ने साफ किया कि किसी दल को समर्थन देना और उसकी सदस्यता ग्रहण करना, दोनों में बड़ा अंतर है।

RJD का अगला कदम

मनोज झा के मुताबिक, राजद इस मामले में विधान परिषद के सभापति से निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद करती है। उन्होंने कहा कि सभापति के सामने यह तय करने का अवसर है कि वे संवैधानिक भूमिका निभाते हैं या नहीं। झा ने चेतावनी दी कि अगर संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी न्यायालय का रुख करेगी। इसके अलावा, चुनाव आयोग को भी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी जाएगी।

राजद ने इस कदम को "जनादेश की चोरी" और "राजनीतिक अनैतिकता" करार दिया है। झा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने यह कदम जदयू को राजनीतिक रूप से कमजोर और अप्रासंगिक करने के लिए उठाया है। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ समर्थन का नहीं, बल्कि जनादेश के सम्मान से जुड़ा है, जिसे पार्टी जनता के बीच भी उठाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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