बिहार: आरक्षण पर NDA में घमासान, इस्तीफ़े की मांग के बीच संजय झा का 'चाय के कप' वाला तंज
बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है, लेकिन इस बार बहस सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही छिड़ गई है। अनुसूचित जाति (SC) कोटे की समीक्षा और उसके भीतर…
बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है, लेकिन इस बार बहस सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही छिड़ गई है। अनुसूचित जाति (SC) कोटे की समीक्षा और उसके भीतर वर्गीकरण की मांग को लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) आमने-सामने हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद अब इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है, जिससे राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
इसी सियासी खींचतान के बीच, जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने एक अनोखे अंदाज में विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर 10 अलग-अलग तरह के चाय के कपों की एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने सवाल किया, "झूठ के पांव नहीं होते! समाज में नफरत फैलाने में जुटे विपक्ष के नेता बताएं कि इस तस्वीर में कौन-सा कप किस जाति के लोगों के लिए है?" उन्होंने आगे लिखा कि वे इन सभी कपों में चाय पी चुके हैं, तो उनकी जाति क्या हुई?
कहां से शुरू हुआ विवाद?
इस पूरे घमासान की शुरुआत बिहार सरकार में मंत्री और HAM नेता संतोष कुमार सुमन के एक बयान से हुई, जिसमें उन्होंने आरक्षण की समीक्षा और अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण की वकालत की। उनके इस बयान पर LJP (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कड़ी आपत्ति जताते हुए मोर्चा खोल दिया।
चिराग ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन से मंत्री पद से इस्तीफे की मांग कर दी। शनिवार को पटना में उन्होंने कहा कि अनुसूचित वर्ग की ताकत उनकी एकजुटता में है और आरक्षण के भीतर बंटवारा करने से पूरे वर्ग को नुकसान होगा। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी दलित आरक्षण में किसी भी तरह के सब-कोटा के सख्त खिलाफ है।
चिराग और मांझी के तर्क
चिराग पासवान ने SC आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था को भी संविधान की भावना के विरुद्ध बताया। उन्होंने तर्क दिया कि अनुसूचित जातियों को आरक्षण सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के आधार पर मिला है, न कि आर्थिक आधार पर। उन्होंने कहा कि अगर जीतन राम मांझी वर्गीकरण के पक्ष में हैं तो उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल और संतोष सुमन को बिहार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं, जीतन राम मांझी ने चिराग के हमले पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि संविधान लागू हुए कई दशक बीत जाने के बाद भी बिहार की 22 अनुसूचित जातियों में से कई आज भी हाशिए पर हैं और उन्हें आरक्षण का अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट के 2024 के एक फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को SC के भीतर वर्गीकरण का अधिकार है। मांझी ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद आरक्षण खत्म करना नहीं, बल्कि उन समुदायों को उचित हिस्सेदारी दिलाना है जो अब तक इससे वंचित रहे हैं। उन्होंने इस्तीफे की मांग पर पलटवार करते हुए कहा कि चिराग को खुद इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वह इस मुद्दे को समझ नहीं रहे हैं।
इनपुट: IANS



