बेतिया बांध टूटने पर पप्पू यादव का सरकार पर हमला, कहा- यह 'पॉलिटिकल डिजास्टर' है
बिहार के पश्चिम चंपारण में बांध टूटने से आई बाढ़ को पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 'पॉलिटिकल डिजास्टर' यानी राजनीतिक आपदा करार दिया है। मंगलवार को बगहा विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावि…
बिहार के पश्चिम चंपारण में बांध टूटने से आई बाढ़ को पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 'पॉलिटिकल डिजास्टर' यानी राजनीतिक आपदा करार दिया है। मंगलवार को बगहा विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद उन्होंने बांध निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पप्पू यादव ने ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
पश्चिम चंपारण के खेरटवा गांव में बांध टूटने के बाद कई गांवों में पानी भर गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पप्पू यादव ने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि गंडक नदी अब महज 300-400 मीटर की दूरी पर है और अगर ऊपर से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो बगहा और वाल्मीकि नगर के बड़े हिस्से में गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
निर्माण और मरम्मत पर उठाए सवाल
सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों-अरबों के बिल बनते हैं, लेकिन बांध बार-बार टूट रहा है। उन्होंने कहा, "यह बांध 2024 में भी टूटा था और अब 2026 में फिर टूट गया है।" उन्होंने दावा किया कि बांध पर ठोकर न होने से नदी के पानी का दबाव बढ़ रहा है और रजभटिया से रतवल तक करीब 12 किलोमीटर के हिस्से में कई जगहों पर बोल्डर तक नहीं लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार हर बार बांधों को सुरक्षित बताती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने सवाल किया, "सालभर काम होने के बावजूद बांध मजबूत क्यों नहीं हो पाता?" पप्पू यादव के अनुसार, बाढ़ से किसानों की हजारों एकड़ जमीन और गन्ने की फसल प्रभावित हुई है।
स्थायी समाधान की मांग
पप्पू यादव ने कहा कि इस समस्या का हल सिर्फ राहत सामग्री बांटने से नहीं होगा। उन्होंने नदियों से गाद हटाने, ठोकर व गार्ड बांध बनाने और बैराजों को मजबूत करने जैसे स्थायी समाधान पर गंभीरता से काम करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, "क्षेत्र में कई प्रभावशाली जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन इसके बावजूद जनता हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर है।"
उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को मिल रही सुविधाओं पर भी चिंता जताई। यादव ने कहा कि लोगों को दूध, नाव, मवेशियों के लिए भूसा, पन्नी और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल रही है। उनके अनुसार, गोपालगंज, मोतिहारी के कुछ हिस्सों के साथ-साथ मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और मिथिला क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है।
इनपुट: IANS



