आंध्र प्रदेश विधान परिषद पर बड़ा फैसला

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मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आंध्र प्रदेश विधान परिषद पर बड़ा फैसला लेते हुए इसको समाप्त करने की पर सहमति बनी। यहाँ आपको बताना चहाते हैं कि आंध्र प्रदेश विधान परिषद पर यह प्रस्ताव गठन या निरस्तीकरण से संबंधित अनुच्छेद 169 (1) के तहत पारित हुआ है । 175 सदस्यों की विधान सभा में इस प्रस्ताव को 133 सदस्यों का समर्थन मिला। इस तरीके से यह प्रस्ताव 2 /3 बहुमत से पास हो गया। विधानसभा में विपक्ष के नेता एन चंद्रबाबू नायडू इस प्रस्ताव से बिल्कुल भी सहमत नहीं थे।


विधान परिषद अभी तक भारत के 7 राज्यों में थी , लेकिन अगस्त, 2019 में जम्मू और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद अब सिर्फ 6 राज्यों में ही है।
आइए अब जानते हैं कि अभी कौन – कौन से राज्यों में विधान परिषद है :-
आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में विधान परिषद हैं.

विधान परिषद किसे कहते हैं ?
साधारण शब्दों में अगर हम समझें तो जिस प्रकार केंद्रीय स्तर पर राज्यसभा होती है, ठीक उसी तरह राज्य में विधान परिषद होती है। राज्यसभा की तरह विधान परिषद के सदस्यों का भी चुनाव नहीं होता ये मनोनीत किये जाते हैं। विधान परिषद सदस्य (MLC) का कार्यकाल राज्यसभा की तरह 6 साल का ही होता है और इसके 1/3 सदस्य हर 2 साल में सेवानिवृत हो जाते हैं।

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आंध्र प्रदेश विधान परिषद को खत्म करने का ये फैसला 27 जनवरी , 2020 को हुई , कैबिनेट की मीटिंग में लिया गया। जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने की।