आत्मनिर्भर भारत की बड़ी कामयाबी: 80% स्वदेशी उपकरणों से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मछलीपट्टनम’ नौसेना में शामिल
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय नौसेना के बेड़े में बुधवार, 29 जुलाई को एक नया स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (Anti-Submarine Warfare Shallow Water…
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय नौसेना के बेड़े में बुधवार, 29 जुलाई को एक नया स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) ‘मछलीपट्टनम’ शामिल हो गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह पोत आठ ऐसे जहाजों की श्रृंखला का सातवां हिस्सा है, जिसे विशेष रूप से उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत इसका 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों से निर्मित होना है, जो भारत के जहाज निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित इस पोत को एक समारोह में गुलरुख आनंद ने जलावतरण किया। इस मौके पर सैन्य कार्य विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद समेत नौसेना और शिपयार्ड के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
समुद्री सुरक्षा को मिलेगी नई धार
‘मछलीपट्टनम’ को पानी के भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और बारूदी सुरंग बिछाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस किया गया है। इसके नौसेना में शामिल होने से तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों की क्षमता में काफी इजाफा होगा। यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और समुद्री क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक
इस युद्धपोत का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है। यह शहर भारत के पूर्वी तट पर अपनी समृद्ध समुद्री और व्यापारिक विरासत के लिए जाना जाता है। यह नामकरण उसी गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते 22 जुलाई को ही इसी श्रेणी का एक और पोत ‘आईएनएस मालवन’ भी नौसेना के बेड़े का हिस्सा बना था, जिसे करवार में कमीशन किया गया।
इनपुट: IANS



