भारत-ब्रिटेन नौसैनिक साझेदारी: नई दिल्ली में अहम बैठक, समुद्र में संयुक्त युद्धाभ्यास 'कोंकण-26' संपन्न
भारत और ब्रिटेन ने अपने नौसैनिक सहयोग को भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इसी कड़ी में नई दिल्ली…
भारत और ब्रिटेन ने अपने नौसैनिक सहयोग को भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इसी कड़ी में नई दिल्ली में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच 17वीं कार्यकारी संचालन समूह (Executive Steering Group) की बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य आपसी तालमेल को बेहतर बनाना और साझा क्षमताओं का विकास करना है।
इस उच्च-स्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय नौसेना की ओर से सहायक नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल सचिन सिक्वेरा और ब्रिटेन की रॉयल नेवी की तरफ से रणनीति एवं नीति निदेशक मेजर जनरल पॉल मेनार्ड ने की। चर्चा का मुख्य केंद्र मौजूदा ऑपरेशनल सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने, व्यावहारिक स्तर पर साझा गतिविधियों को बढ़ाने और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में साझेदारी के नए अवसर तलाशने पर रहा।
समुद्र में शक्ति प्रदर्शन और तालमेल
जिस समय नई दिल्ली में यह महत्वपूर्ण वार्ता चल रही थी, ठीक उसी दौरान ब्रिटेन के समुद्र में भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था। यहां भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं ने 'कोंकण-26' नामक एक संयुक्त युद्धाभ्यास को अंजाम दिया, जो दोनों देशों के बीच दो दशकों से अधिक पुरानी समुद्री साझेदारी का हिस्सा है।
भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल इस अभ्यास के लिए 8 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पहुंचा था। यह युद्धाभ्यास 15 अक्टूबर तक चला, जिसमें समुद्री तालमेल, हवाई गतिविधियों और पनडुब्बी रोधी युद्ध का अभ्यास किया गया।
दो चरणों में संपन्न हुआ 'कोंकण-26'
यह वार्षिक अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में, बंदरगाह पर दोनों नौसेनाओं के कर्मियों ने पेशेवर अनुभव साझा किए, एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा किया और खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस दौरान आईएनएस त्रिशूल को आम आगंतुकों के लिए भी खोला गया था। दूसरे चरण में दोनों नौसेनाओं ने समुद्र में विभिन्न परिस्थितियों में मिलकर काम करने की अपनी क्षमताओं को परखा।
इनपुट: IANS



