बदलती दुनिया में भारत-अमेरिका संबंध: विदेश मंत्री जयशंकर ने साझा हितों के विस्तार पर जोर दिया
भारत और अमेरिका के संबंधों को मौजूदा दौर की बदलती वैश्विक व्यवस्था में और गहरा करने के लिए साझा हितों का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। यह बात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित एक…
भारत और अमेरिका के संबंधों को मौजूदा दौर की बदलती वैश्विक व्यवस्था में और गहरा करने के लिए साझा हितों का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। यह बात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जयशंकर ने कहा कि व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के लिए सहयोग की नई संभावनाएं मौजूद हैं।
मुंबई में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्री ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उनकी पत्नी और अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना दोनों लोकतांत्रिक देशों का एक साझा हित है।
साझेदारी का ऐतिहासिक सफर
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि मुंबई और अमेरिका के बीच संपर्क की शुरुआत कभी बर्फ के व्यापार से हुई थी, जो आज वित्तीय और प्रौद्योगिकी सहयोग तक पहुंच गई है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की शिकागो यात्रा से लेकर जनरल इलेक्ट्रिक के रिएक्टरों द्वारा मुंबई की ऊर्जा जरूरतों में योगदान और शहर में स्टारबक्स के पहले आउटलेट खुलने जैसे कई उदाहरण दिए। साथ ही उन्होंने मुंबई से संबंध रखने वाले अमेरिकी क्रिकेटर सौरभ नेत्रवलकर का भी जिक्र किया।
आतंकवाद पर साझा रुख
मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले को याद करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों की भी जान गई थी। उन्होंने 26/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के लिए मार्को रुबियो की सराहना की और तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण पर अमेरिकी प्रशासन के फैसले का स्वागत किया। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और उसे उम्मीद है कि उसके साझेदार देश भी आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएंगे।
भविष्य की दिशा
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई अमेरिकियों ने समर्थन दिया था और आजादी के बाद भी शिक्षा से लेकर कृषि और प्रौद्योगिकी तक, अमेरिकी साझेदारी ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद, दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। जयशंकर ने क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज जैसी पहलों को इस बढ़ती साझेदारी का प्रमाण बताया और अमेरिका को उसकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर शुभकामनाएं दीं।
इनपुट: IANS



