सज्जन कुमार के घर भाजपा सांसदों के जाने पर भड़के एचएस फूलका, कहा - यह पार्टी के रुख के खिलाफ
1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार के घर शोक व्यक्त करने पहुंचे तीन भाजपा सांसदों के कदम पर पार्टी के ही नेता और वरिष्ठ वकील एचएस फूलका ने तीखी नाराज़गी जताई है। उन्होंने इस कदम को भाजपा के…
1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार के घर शोक व्यक्त करने पहुंचे तीन भाजपा सांसदों के कदम पर पार्टी के ही नेता और वरिष्ठ वकील एचएस फूलका ने तीखी नाराज़गी जताई है। उन्होंने इस कदम को भाजपा के उस घोषित रुख के विपरीत बताया है, जिसके तहत पार्टी हमेशा से दंगा पीड़ितों के साथ खड़ी रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, फूलका ने कहा कि जब पार्टी लगातार दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग करती रही है, तो इन सांसदों को वहां जाने की क्या ज़रूरत थी।
लंबे समय तक 1984 के पीड़ितों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले फूलका ने पार्टी के इस रुख का समर्थन किया कि तीनों सांसदों को नेतृत्व द्वारा फटकार लगाई गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई की और सांसदों को स्पष्ट किया कि उनका यह कदम पार्टी लाइन के अनुरूप नहीं था।
भाजपा का लंबा संघर्ष और स्टैंड
फूलका ने 1984 के नरसंहार के बाद से पीड़ितों को न्याय दिलाने में भाजपा के प्रयासों को याद किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद भी इन मामलों में पीड़ितों की ओर से अदालतों में पेश होते रहे। उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना का भी जिक्र किया, जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई मामले दोबारा खुलवाए और फूलका को अपना सलाहकार नियुक्त किया था।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान ही नानावटी आयोग का गठन हुआ, जिसकी सिफारिशों के आधार पर सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ी और अंततः उन्हें सजा हुई। फूलका ने यह भी दावा किया कि सज्जन कुमार की सजा के बाद भी भाजपा सरकार ने उनकी जमानत और पैरोल का पुरजोर विरोध किया था। तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गृह मंत्री के निर्देश पर हर सुनवाई में पेश होकर इसका विरोध किया।
'व्यक्तिगत संबंध' का तर्क खारिज
जब यह दलील दी गई कि सांसद व्यक्तिगत संबंधों और सज्जन कुमार के क्षेत्रीय प्रभाव के कारण वहां गए थे, तो फूलका ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया, "जब भाजपा लगातार 1984 के दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी की मांग करती रही है, तो ऐसे में इन सांसदों को वहां जाने की जरूरत क्यों पड़ी?"
उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र से भाजपा और जाट समुदाय के कई अन्य नेता भी हैं, लेकिन किसी ने ऐसा कदम नहीं उठाया। फूलका के अनुसार, व्यक्तिगत संबंध अपनी जगह हैं, लेकिन जब किसी व्यक्ति पर गंभीर आपराधिक दोषसिद्धि हो और पार्टी दशकों से पीड़ितों के पक्ष में खड़ी हो, तो सार्वजनिक रूप से ऐसे व्यक्ति की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होना राजनीतिक रूप से गलत संदेश देता है।
इनपुट: IANS



