मानसून की देरी और अल नीनो की आशंका: केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया सरकार का एक्शन प्लान
देश में मानसून की रफ़्तार धीमी पड़ने और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियों और रणनीति की जानकारी दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोम
देश में मानसून की रफ़्तार धीमी पड़ने और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियों और रणनीति की जानकारी दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को बताया कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए एक स्पष्ट रणनीति के साथ ज़मीनी स्तर पर काम किया जा रहा है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को बताया कि जून महीने में बारिश सामान्य से 33 प्रतिशत कम हुई थी, लेकिन जुलाई में हालात कुछ सुधरे हैं और यह कमी अब 24 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल की बारिश के बाद कम वर्षा वाले जिलों की संख्या भी 262 से घटकर 178 हो गई है।
बुवाई पर असर और वैकल्पिक फसलें
केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि मानसून में देरी का सीधा असर खरीफ की बुवाई पर पड़ा है। अब तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर इसका विशेष प्रभाव देखा गया है।
इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलें उगाने की सलाह दी है, जिन्हें कम समय और कम पानी की आवश्यकता होती है।
निगरानी और राज्यों के लिए योजना
शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, अल नीनो की आशंकाओं के मद्देनज़र एक मज़बूत निगरानी प्रणाली सक्रिय की गई है। इसमें अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप और राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम शामिल हैं, जो लगातार मानसून, बुवाई और बाज़ार की स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं।
विशेष रूप से 13 राज्यों—महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा—पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
किसानों के लिए सरकारी तैयारी
सरकार ने किसानों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं। चौहान ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति में बुवाई प्रभावित न हो, इसके लिए 1.75 लाख क्विंटल बीजों का एक राष्ट्रीय भंडार तैयार रखा गया है। इसके अलावा, आईसीएआर की मदद से प्रभावित हो सकने वाले जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) तैयार कर राज्यों को भेजी गई हैं। 'खेत बचाओ अभियान' के तहत 80 लाख से ज्यादा किसानों से सीधा संपर्क साधा गया है। साथ ही, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।
इनपुट: IANS



