एम्स ट्रॉमा सेंटर: घायल कार सवारों में 69% ने सीट बेल्ट नहीं पहनी थी
एम्स ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में घायल कार सवारों में 69% ने सीट बेल्ट नहीं पहनी थी, जो पिछले वर्ष 46% था। बिना सीट बेल्ट ड्राइवरों का अनुपात भी 19% से बढ़कर 40% हुआ। कुल 19,472 दुर्घटना मामले दर्ज, जिनमें 77% दोपहिया सवार थे। डॉ. कामरान फारूक ने सीट बेल्ट के महत्व पर जोर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं में सीट बेल्ट न पहनने का चिंताजनक रुझान सामने आया है।
प्रमुख आंकड़े
रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में घायल कार यात्रियों में 69% ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 46% था। सीट बेल्ट न पहनने वाले ड्राइवरों का प्रतिशत 19% से बढ़कर 40% हो गया। इस अवधि में सड़क दुर्घटना के 19,472 मामले दर्ज हुए, जिनमें 77% दोपहिया वाहन सवार, 17% पैदल यात्री और 6% कार सवार थे।
आयु और इलाज
घायलों में 35% की उम्र 21-30 वर्ष और 23% की 31-40 वर्ष थी; लगभग 60% मरीज 40 वर्ष से कम के थे। भर्ती मरीजों में 27% को आईसीयू में रखा गया और 23% की सर्जरी हुई।
विशेषज्ञ की राय
ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. कामरान फारूक के अनुसार, सीट बेल्ट कार में सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। उन्होंने कहा कि सीट बेल्ट न पहनने पर सिर, छाती और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट का खतरा रहता है, और पिछली सीट पर बैठने वालों को भी सीट बेल्ट पहननी चाहिए।



