AIIMS में AI के इस्तेमाल से होगा मरीजों का इलाज, जानें कैसे और कहां होगा AI का इस्तेमाल h3>
दरअसल, एम्स प्रशासन ने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और रोबोट के इस्तेमाल की संभावना का हवाला देते हुए एक कमिटी बनाई गई है, जो इन पर स्टडी कर अपना सुझाव देगी और इसे एम्स में कैसे लागू किया जा सकता है, इसे लेकर रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि अभी अमेरिका जैसे देश में भी इसका इस्तेमाल सीमित लेवल पर ही हो रहा है। चूंकि एम्स में इलाज में पैसा नहीं लगता है, इसलिए यहां पर लागू करने में उतनी परेशानी या दिक्कत नहीं होने वाली है।
AI का इस्तेमाल कैसे और कहां होगा?
क्लीनिकल ऑपरेशन: अधिकारी ने बताया कि अगर एम्स में डायबिटीज के 500 मरीजों का इलाज किया जाता है, तो इसकी पूरा डिटेल लेकर एक डाटा तैयार किया जाएगा। फिर इसके आधार पर एल्गोरिदम तैयार किया जाएगा। जिसके आधार पर एक मानक बनाना होगा कि अगर मरीज की उम्र 45 साल से ऊपर है, पेट बाहर निकला है, डायबिटीज है तो उसके इलाज में क्या-क्या शामिल किया जा सकता है।
क्वॉलिटी केयर में होगा फायदा
यह देखा जाएगा कि मरीज को कैसा इलाज मिल रहा है, उसकी क्वॉलिटी कैसी है? साथ में यह भी देखा जाएगा कि कोई मरीज डॉक्टर के पास कब आता है और उसका इलाज शुरू होने में कितना वक्त लगता है। आमतौर पर डॉक्टर नए मरीज को कोई जांच लिखते हैं। इसके बाद वह जांच कराने के लिए किसी सेंटर में जाता है। यहां जांच होती है, फिर रिपोर्ट आती है। उसके बाद फिर वह रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास जाता है। तब जाकर उसका इलाज शुरू होता है। अधिकारी के अनुसार इसमें कितना समय लगा, कितना समय हम कम कर सकते हैं। इसके लिए एम्स प्रशासन काम कर सकता है, ताकि डॉक्टर के देखने के बाद मरीज का तुरंत इलाज शुरू हो सके।
मशीन और कवॉलिटी में गड़बड़ी का चलेगा पता
लैब में 200 सैंपल की जांच होती है। अगर इनमें से 4 सैंपल ऐसे हैं, जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है, तो भी मरीज को यह जानने में काफी समय लग जाता है। लेकिन एआई के इस्तेमाल से पता चल जाएगा कि ऐसे मरीजों का तुरंत इलाज जरूरी है। वहीं, कोई मशीन 10 जांच करती है और कोई पांच ही। तो इसमें क्या गड़बड़ी आ रही है, इसे कैसे दूर किया जा सकता है। इसका हल भी एआई की मदद से मिल जाएगा।

