Advertising
<

नए हिजरी वर्ष की खुशियों के बाद नौ दिन गम-ए-हुसैन में डूबेगा दाऊदी बोहरा समाज – Barwani News

0
नए हिजरी वर्ष की खुशियों के बाद नौ दिन गम-ए-हुसैन में डूबेगा दाऊदी बोहरा समाज – Barwani News

नए हिजरी वर्ष की खुशियों के बाद नौ दिन गम-ए-हुसैन में डूबेगा दाऊदी बोहरा समाज – Barwani News

NEWS4SOCIALसंवाददाता| बड़वानी सोमवार से दाऊदी बोहरा समाज नए हिजरी वर्ष 1448 का स्वागत पारंपरिक उल्लास के साथ करेगा। नववर्ष के पहले दिन जिले के समाजजन एक-दूसरे को मुबारकबाद देंगे, घरों में फल, ड्राय फ्रूट व मिठाइयों के आकर्षक थाल सजाएंगे। परिवारों में खुशियों का माहौल रहेगा। हालांकि इस उत्सव के अगले ही दिन मंगलवार से पूरा समाज इमाम हुसैन की याद में गम और इबादत के माहौल में प्रवेश कर जाएगा। मोहर्रम की दूसरी तारीख से लेकर योमे आशूरा यानी दसवीं तारीख तक समाजजन मस्जिदों में वाअज (धार्मिक प्रवचन), गम-ए-हुसैन की मजलिस व पांच वक्त की नमाज में शामिल होकर इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करेंगे। समाज के मीडिया समन्वयक इब्राहिम रिजवी ने बताया इस वर्ष 16 जून से 24 जून तक अशरा मुबारक के दौरान बोहरा समाज के व्यापारी अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखेंगे। सिर्फ ऑफलाइन ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन कारोबार भी इन नौ दिनों तक संचालित नहीं किया जाएगा। इस संबंध में व्यापारियों ने पहले से ही ग्राहकों और व्यावसायिक सहयोगियों को इसकी सूचना देना शुरू कर दिया है। अशरा मुबारक की वाअज लंदन में आयोजित होगी हुसैन का गम व आस्था का संदेश समाज के 53वें धर्मगुरु डॉ. सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन मौला का स्पष्ट फरमान है कि मोहर्रम की दूसरी से दसवीं तारीख तक सभी समाजजन समय से पहले मस्जिद पहुंचकर वाअज में शामिल हो, शाम की मजलिस में उपस्थित रहे व पांचों वक्त की नमाज अदा करें। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए समाज के लोगों ने अपने दैनिक कार्यों व व्यवसायों को पूरी तरह स्थगित रखने का निर्णय है। ताकि इबादत और गम-ए-हुसैन में किसी प्रकार की बाधा न आए। अशरा के दौरान फोन कॉल व संदेशों से व्यवधान न हो, इसलिए समाजजन अपने परिचितों को पहले ही सूचित कर चुके हैं। समाज की संस्थाओं ने स्कूलों और कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की नौ दिनों की अनुपस्थिति के लिए संबंधित शिक्षण संस्थानों को आवेदन भेज दिए हैं। अभिभावकों का मानना है कि इन दिनों बच्चों की धार्मिक सहभागिता और आध्यात्मिक शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण होती है, इसलिए वे भी अशरा की सभी गतिविधियों में शामिल रहेंगे। समाज के लोगों का मानना है कि हुसैन का गम हर वर्ष आस्था के नए द्वार खोलता है। मोहर्रम की दूसरी से दसवीं तारीख तक पूरा वातावरण या हुसैन की सदाओं से गूंजता रहता है। श्रद्धालु इमाम हुसैन की तीन दिन की भूख-प्यास और उनकी महान कुर्बानी को याद कर भावुक हो उठते हैं। यही कारण है कि हिजरी नववर्ष की खुशियों के तुरंत बाद पूरा बोहरा समाज नौ दिनों तक इबादत, अनुशासन, त्याग और गम-ए-हुसैन में पूरी तरह समर्पित नजर आता है।

मध्यप्रदेश की और खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे – Madhya Pradesh News